मुवानी डिग्री कॉलेज टिनशेड में चल रहा
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थल (पिथौरागढ़)। शासन उच्च शिक्षा के प्रति कितनी लापरवाह है इसका नमूना राजकीय महाविद्यालय मुवानी में देखने को मिलता है। एक प्रकार से उच्च शिक्षा के नाम पर दूरदराज के बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। वर्ष 2014 में क्षेत्र की जनता के नाम पर जब यहां डिग्री कॉलेज मंजूर हुआ तो पूरे इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई थी। तब कॉलेज को टिनशेड में चलाने का फैसला लिया गया और यह भी कहा गया कि एक साल के भीतर कॉलेज का भवन तैयार हो जाएगा और विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा की उचित सुविधा मिलने लगेगी लेकिन भवन बनाने की कोई तैयारी नहीं की गई है।
मुवानी कॉलेज में प्रथम प्राचार्य के तौर पर डॉ. एसएस भंडारी की तैनाती हुई थी। उन्होंने अपने स्तर से कॉलेज की व्यवस्थाओं को सुधारने का प्रयास किया लेकिन छह माह पूर्व उनका स्थानांतरण हो गया। उनके स्थान पर डॉ. गंगा बोरा कॉलेज की प्राचार्य हैं। कॉलेज में प्रवक्ताओं के छह पद सृजित हैं लेकिन अर्थशास्त्र, हिंदी, राजनीतिशास्त्र के प्रवक्ता का पद खाली है। कॉलेज में संसाधनों की भारी कमी है। टिनशेड में बैठने के लिए जगह कम पड़ रही है। इसी कारण हर साल छात्रसंख्या बढ़ने के बजाय कम हो रही है। कॉलेज में इस समय बीए की तीन कक्षाओं का संचालन हो रहा है। छात्रसंख्या 299 है। स्थानीय लोग भी कॉलेज का भवन बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। यहां तक कि कॉलेज का भवन बनाने के लिए 49 नाली जमीन दान में दी गई है। भवन के लिए न तो धन मंजूर हुआ है। न उसके निर्माण की कोई तैयारी की जा रही है।
उच्च शिक्षा के नाम पर मजाक ठीक नहीं
थल। मुवानी के सामाजिक कार्यकर्ता अमरजीत का कहना है कि उच्च शिक्षा के नाम पर इस तरह की मजाक नहीं होनी चाहिए। वह कहते हैं कि कॉलेज में गरीब परिवारों के बच्चे ही प्रवेश लेते हैं लेकिन उनको उच्च शिक्षा का कोई माहौल नहीं मिलता। वह कहते हैं कि सबसे पहले कॉलेज का भवन बनाना चाहिए।
पहले ढांचागत सुविधा जुटाए सरकार
थल। मुवानी व्यापार संघ अध्यक्ष सोबन कार्की का कहना है कि सुविधाएं नहीं होंगी तो उच्च शिक्षा का मकसद पूरा नहीं होगा। सरकार पहले ढांचागत सुविधाएं जुटाए उसके बाद ही कॉलेजों को खोलने की मंजूरी दे। अन्यथा कई वर्षों तक अव्यवस्थाओं के बीच कॉलेजों का संचालन करना पड़ता है। यह गलत है।