बनलेख-ललुवापानी मोटरमार्ग में हो रहे पुनर्निर्माण कार्य की जांच तकनीकी सेल ने पूरी कर ली है। जांच टीम ने निर्माण कार्य में प्रथम दृष्टया गुणवत्ता में खामी पाई है। अलबत्ता विस्तृत रिपोर्ट कमेटी में शामिल तकनीकी सदस्यों के साथ मिलकर, स्टीमेट की डिटेल देखकर तैयार की जाएगी। पांच दिन के भीतर रिपोर्ट डीएम को भेजी जाएगी। उनके निर्देश पर कार्रवाई की जाएगी। जांच के आदेश डीएम दीपेंद्र कुमार चौधरी ने ग्रामीणाें की शिकायत के बाद दिए थे।
कार्यदायी संस्था विश्व बैंक ने मई 2014 में सात किलोमीटर लंबे मोटरमार्ग में पुनर्निर्माण का काम शुरू किया। 3.48 करोड़ रुपए की लागत से होने वाले इस पुनर्निर्माण के काम को अगस्त 2015 में पूरा करना था। योजना के तहत 50 से अधिक कलमठ, दीवार का काम होना था। एक पखवाड़े पूर्व दीवार धंसने से एक कैंटर खाई में जा गिरा था। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में घटिया गुणवत्ता होने की शिकायत डीएम से की थी। जिसके बाद डीएम ने सीडीओ के नेतृत्व में चार सदस्यीय तकनीकी सेल से मोटरमार्ग की जांच कराने के आदेश दिए थे।
रविवार को सीडीओ एसएसएस पांगती के नेतृत्व में एसडीएम नरेश दुर्गापाल, आरईएस के अधिशासी अभियंता देवेंद्र बिष्ट, लोनिवि के भुवन पंत ने मौके पर जाकर पुनर्निर्माण कार्य की जांच की। जांच के बाद सीडीओ ने बताया कि प्रथम दृष्टया निर्माण कार्य में घटिया सामग्री का निर्माण, दीवारों में सीमेंट की कमी, अंदर से खोखली होना, कलमठ के लेंटर को सड़क की सीध में बनाने समेत दीवारों में टेढ़ापन मिला। उन्होंने कहा कि क्वालिटी मानीटरिंग करने को तैनात किए गए थर्ड पार्टी कंसलटेंट की टीम को दिसंबर 2014 में तैनात किया गया, जबकि निर्माण कार्य मई 2014 में ही शुरू हो गया था। सीडीओ ने बताया कि स्टीमेट डिटेल देखने के बाद ही विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी। वहां लोनिवि के अधीक्षण अभियंता सीएस भट्ट, विश्व बैंक के एई शरद कुमार, एई अरुण वर्मा, बीएस बोहरा, आरईएस के जेई प्रमोद वर्मा, कंसलटेंट टीम के क्वालिटी कंट्रोल मैनेजर संजय कुमार, सुपरवाइजर रवींद्र सिंह, राम सिंह, कुंदन सिंह यादव मौजूद थे।
अनुभवी मिस्त्री से करवाना निर्माण कार्य
चंपावत। कलमठ के अंदर की दीवारें टेढ़ी थीं। दीवारें देखकर लोनिवि के अधीक्षण अभियंता सीएस भट्ट ने मौके पर मौजूद ठेकेदार से कहा कि आगे से निर्माण कार्य अनुभवी मिस्त्री से करना।
वन, राजस्व विभाग की टीम करेगी जांच
चंपावत। बनलेख ललुवापानी मोटर मार्ग की अधिग्रहीत भूमि सड़क के मध्य बिंदु से 28 फीट ऊपर, 15 फीट नीचे की तरफ है। पुनर्निर्माण कार्य में अधिग्रहीत भूमि से निकलने वाले पत्थर का ही इस्तेमाल किया जा सकता है। एसडीएम नरेश दुर्गापाल ने वन विभाग, राजस्व विभाग की टीम से संयुक्त जांच कराने की बात कही है।