गंगोलीहाट में पीएम श्री जीजीआईसी का बदहाल भवन। संवाद
गंगोलीहाट (पिथौरागढ़)। सरकारी शिक्षा व्यवस्था की बेहतरी के दावे सिर्फ कागजों पर हो रहे हैं। जीजीआईसी गंगोलीहाट इसका प्रमाण है। सीएम घोषणा के बाद भी जर्जर विद्यालय भवन का नवनिर्माण नहीं हो सका है। ऐसे में यहां 166 छात्राएं खतरे के बीच सुनहरे भविष्य के सपने बुनने के लिए मजबूर हैं।
पीएम श्री जीजीआईसी गंगोलीहाट के जर्जर भवन में पठन-पाठन खतरे का सबब बना है। छत और दीवारों पर पड़ी दरारें किसी बढ़ी घटना की तरफ इशारा कर रही हैं। अपने बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए पिछले सात साल से अभिभावकों की ओर से किए जा रहे आंदोलन के बाद पिछले वर्ष नवंबर में गंगोलीहाट पहुंचे सीएम ने इसके नवनिर्माण की घोषणा की।
मंडी परिषद ने तत्परता दिखाते हुए इसका आंकलन तैयार कर शासन को भेजा। यह प्रस्ताव सरकारी फाइलों में गुम है और सीएम घोषणा धरातल पर उतरने का इंतजार कर रही है। जर्जर भवन में खतरे के बीच पढ़ रहीं 166 बेटियां निराश हैं।
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खतरे को देखते हुए पांच कक्षों को करना पड़ा बंद
पिछले साल छात्राओं की सुरक्षा को देखते हुए विद्यालय प्रबंधन को पांच कक्षों को बंद कर इनमें आवाजाही पर रोक लगानी पड़ी। तब से कक्षा छह से 12 वीं तक की कक्षाओं का संचालन सिर्फ आठ कक्षों में हो रहा है। विद्यालय में हिंदी, संस्कृत और रसायन विज्ञान के प्रवक्ता और सामाजिक विज्ञान की सहायक अध्यापिका नहीं हैं। इन बदहाल व्यवस्थाओं से छात्राओं के साथ अभिभावक भी परेशान हैं।
कोट
विद्यालय भवन के पुनर्निर्माण के लिए 5.5 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया है। धनराशि मिलते ही काम शुरू होगा।
सुयश जोशी, जेई, मंडी परिषद, हल्द्वानी।