मध्य हिमालयी क्षेत्र में जहां इस बार भारी बारिश से कई जगह तबाही मची है, वहीं उच्च हिमालयी क्षेत्र के दारमा घाटी में प्री-मानसून की बारिश नहीं होने से फसल सूखने लगी है। पानी के स्रोतों का स्तर कम हो गया है। बोई गई फसल अंकुरित भी नहीं हो पा रही है। 2013 की आपदा के समय बुरी तरह प्रभावित इस इलाके के लोग मौसम में आ रहे बदलाव से खासे चिंतित हैं। आमतौर पर उच्च हिमालयी क्षेत्र में मई में प्री-मानसून की अच्छी बारिश हो जाती थी, लेकिन इस बार इस इलाके में बारिश नहीं हुई।
दारमा घाटी का दौरा करने के बाद समाजसेवी लीला बनग्याल ने जिलाधिकारी को भेजे पत्र में कहा कि दर, बुंगलिंग, तीजम, बालिग, दुग्तू, गो, नागलिंग, बोन, बौंगलिंग गांवों में सूखे का जबर्दस्त असर है। इन गांवों में पानी के स्रोत सूख गए हैं। खेतों में बोई फाफर, पल्थी, आलू, राजमा और मटर की फसल सूखने लगी है। पानी के स्रोत सूखने से पेयजल का संकट गहराने की आशंका है।
उन्होंने पत्र में उल्लेख किया है कि 2013 की आपदा के बाद बौंगलिंग और तीजम गांव में बिजली की सप्लाई भी ठप है। आपदा से प्रभावित इस इलाके में इस बार लोग सूखे की मार से त्रस्त हैं। उन्होंने बताया कि दारमा घाटी के लोग सब्जी और राजमा पैदा कर आजीविका चलाते हैं, लेकिन इस बार उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट आ जाएगा। श्रीमती बनग्याल ने गांवों की स्थिति की पूरी रिपोर्ट डीएम को भेज दी है। साथ ही तत्काल सर्वे कराने और प्रभावितों को मुआवजा देने की मांग की है।