इस तरह टूट गया नाभीढांग से कुटी जाने वाला रास्ता
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दारमा घाटी में गलछिन नदी पर बना पैदल पुल बह गया है, इससे नाभीढांग और कुटी के बीच पैदल रास्ता बंद हो गया है, नतीजतन कुटी गांव में जरूरी वस्तुओं की किल्लत हो गई है। तवाघाट से पांगू और नारायणआश्रम जाने के लिए खेत के पास सड़क करीब एक महीने से बंद पड़ी है। इन सबके बीच दारमा और व्यास घाटी में लोग भारी संकट में हैं। घोड़े और खच्चरों के चलने लायक रास्ता भी नहीं रह गया है। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने इस समस्या की जानकारी जिलाधिकारी को दी है। कहा कि यदि जल्द पैदल रास्तों की मरम्मत नहीं की गई तो इलाके में जरूरी वस्तुओं का अभाव हो जाएगा।
जिला पंचायत सदस्य मंजुला बुदियाल ने क्षेत्र का दौरा करने के बाद बताया कि दारमा और व्यास घाटी में लोग भारी संकट में हैं। कुटी के लोगों को नाभीढांग और गुंजी आने में भारी कठिनाई हो रही है। पैदल रास्ते टूट गए हैं। नदियां उफान पर हैं। इस कारण घोड़ों से सामान पहुंचना कठिन हो गया है। उन्होंने कहा कि गलछिन पैदल पुल बह गया है। इस कारण दारमा घाटी के कई गांवों का संपर्क कट गया है। नंफा पुल पहले ही बह गया था।
अब तक उसकी जगह नया पुल नहीं बनाया गया है। जिलाधिकारी एचसी सेमवाल ने लोनिवि के अधिकारियों से कहा कि तत्काल रास्तों की मरम्मत का काम शुरू करें। इस समय दारमा और व्यास घाटी में लोग ग्रीष्मकालीन प्रवास पर रहने को आते हैं। अक्तूबर से इन लोगों की घाटियों की ओर वापसी होने लगेगी।