दारमा घाटी के सेला में रास्ता बंद होने को लेकर बैठक करते लोग।
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दारमा घाटी को जाने वाले रास्ते से अब भी बर्फ नहीं हट पाई है। ग्लेशियर टूटने से रास्ते में बर्फ ही बर्फ पटी है। इस कारण घाटी के 14 गांवों के लोग भारी दिक्कत में हैं। लोगों ने सेला में बैठक कर रास्ते से बर्फ न हटने पर आंदोलन छेड़ने का एलान किया है।
मंगलवार को दारमा घाटी से लौटे दांतू गांव के होम स्टे संचालक महेश दताल ने रास्ते के हालात बताते हुए कहा कि तीन दिन पूर्व वह हिमाचल के 4 पर्यटकों को धारचूला से सेला तक लगभग 45 किमी वाहन से ले गए थे। सेला से आगे रास्ते में बर्फ पटी होने के कारण सेला से नांगलिग, बांलिग, दुग्तू, और दांतू तक का 18 किमी का सफर मोटर साइकिल पूरा किया। काफी दिक्कतों को पार करने के बाद सैलानी पंचाचूली ग्लेशियर और दानवीर जसुली शौक्याणी के स्मारक के दीदार किए। होम स्टे संचालक महेश दताल और संजय दताल ने बताया कि बर्फ हटाने का काम काफी धीमी गति से किया जा रहा है। कहा कि बर्फ हटाने के लिए सीपीडब्यूडी ने दो जेसीबी लगाई हैं। उसमे से एक जेसीबी खराब हो गई है।
दारमा सेवा संगठन के अध्यक्ष नरेंद्र सेलाल ने बताया कि सेला के लोग अपने गांव में सकुशल पहुंच गए हैं। बताया कि बोरुंग नाला और यूसुंग नाले में लगभग 10 से 20 फीट का हिमखंड आया है। हिमखंड को हटाया नहीं गया तो नांगलिग, बॉलिंग, दुग्तू, सोन, बोन, फिलम, गो, तिदांग, ढाकर, मारछा और सीपू गांव के लोगों को माइग्रेशन में जाते समय काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। सीपू के प्रधान सुरेश सीपाल ने बताया कि उनके गांव के चार परिवार गांव को रवाना हो गए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता शकुंतला दताल ने कहा कि अब माइग्रेशन का समय आ चुका है। प्रशासन और विभाग को शीघ्र सड़क खोलनी चाहिए। सड़क नहीं खुली तो दारमा घाटी के लोग आंदोलन छेड़ देंगे।
रादस्व उप निरीक्षक ने हालात की रिपोर्ट एसडीएम को दी
धारचूला। दुग्तू के राजस्व उप निरीक्षक एनएस बोरा ने दारमा घाटी का भ्रमण कर रिपोर्ट उपजिलाधिकारी के सामने रखी है। राजस्व उप निरीक्षक ने बताया है कि मार्ग सेला तक ही खुला है। सड़क में बर्फ पटी होने के कारण माइग्रेशन शुरु नहीं हो पाया है। बर्फबारी से सोलर प्लेटें और कुछ मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। सेला को जाने वाला मार्ग पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है।