धारचूला (पिथौरागढ़)। ग्लेशियर से निकलने वाली धौली नदी में जगह जगह सड़क निर्माण के दौरान निकला मलबा पटता जा रहा है। निर्माण के काम में लगी एजेंसियों को इस बात की कोई चिंता नहीं है कि मलबे से नदी को कितना नुकसान पहुंचेगा।
दारमा घाटी के लिए हो रहे सड़क निर्माण के दौरान कई स्थानों पर नदी मलबे से पट गई है। नदी के किनारे बसे गांव के लोगों को भी नदी के संरक्षण की चिंता नहीं है। इसे लोगों की मजबूरी भी कहा जा सकता है क्योंकि अब तक अधिकांश घरों में शौचालय न बनने के कारण शौच के लिए ज्यादातर लोग नदी के किनारे ही जाते हैं।
धौली जब तक आबादी में प्रवेश नहीं करती तब तक उसमें पानी बेहद साफ रहता है। आबादी में प्रवेश करते ही नदी में गंदगी का मिश्रण होने लग जाता है। धौली से ही एनएचपीसी की धौलीगंगा बिजली परियोजना बनी है। तवाघाट में यह नदी महाकाली में मिल जाती है।
धौली के किनारे बसे सोबला, दर, बौंगलिंग, नागलिंग, गो, फिलम, मार्छा, सीपू, बोन, सौंग गांवों के पास पहुंचते ही नदी में गंदगी, कचरा भरने लग जाता है। कई स्थानों पर तो लोग इसी नदी का पानी पीने के लिए उपयोग में लाते हैं लेकिन उनको नदी में पट रही गंदगी की चिंता नहीं रहती। इस समय नदी में करीब दस स्थानों पर सड़क निर्माण का मलबा गिर रहा है। बारिश के समय यही मलबा नदी के प्रवाह को तेज करेगा और तबाही की आशंका बढ़ जाएगी।
धारचूला। स्थानीय निवासी कैलाश रावत का कहना है कि नदियों के संरक्षण के लिए योजना बननी चाहिए। सिर्फ देश की बड़ी नदियों के लिए ही योजनाएं न बनें। जब छोटी नदियां साफ रहेंगी तभी बड़ी नदियों को प्रदूषण से मुक्त रखा जा सकेगा। सरकार को चाहिए कि पहाड़ की नदियों के संरक्षण की योजना बनाए।
धारचूला। स्थानीय निवासी महेंद्र बुदियाल का कहना है कि नदियों को संरक्षित करने के लिए अभियान चलाने की जरूरत है। जब लोग नदियों का महत्व समझेंगे तभी वह उसमें गंदगी भी नहीं कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर जागरूकता का अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए कुछ स्थानीय नौजवानों का सहयोग लिया जाएगा।
धारचूला। तहसीलदार आईबी मल का कहना है कि नदियों का महत्व समझाने के लिए लोगों को जागरूक किया जाएगा। खुले में शौच की प्रथा बंद करने के लिए अभियान चला हुआ है। कई लोग जानकारी के अभाव में इसका लाभ नहीं ले पा रहे हैं। अब बिना शौचालय वाले परिवारों को सूचीबद्ध किया जा रहा है।