दारमा घाटी की सड़क के निरीक्षण के लिए गई अधिकारियों की टीम।
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इस बार बर्फबारी ने दारमा घाटी के 10 गांवों को खासा नुकसान पहुंचाया है। अब मई माह में उच्च हिमालय की ओर रुख करने वाले इन दस गांवों के लोगों का सामना 57 क्षतिग्रस्त मकानों, दो ढह गए स्कूलों, क्षतिग्रस्त मंदिर और टूटी फूटी सोलर लाइटों से होगा। गांव वालाें के आग्रह पर सीमा सुरक्षा बल ने सर्वे किया तो यह तस्वीर खुलकर सामने आई।
दारमा घाटी के 14 गांवों के लोग हर साल माइग्रेशन करते हैं। मई में दारमा जाने के बाद सितंबर में वापस धारचूला लौट आते हैं। इस वर्ष उच्च हिमालयी क्षेत्र में भारी बर्फबारी हुई है। पांच से छह फीट तक हिमपात होने से ग्रामीण अपने भवनों की सुरक्षा को लेकर चिंतित थे। भालुओं ने भी कई मकानों को क्षति पहुंचाई थी। सेला गांव में भालू द्वारा नुकसान पहुंचाने की सूचना के बाद दीलिंग दारमा सेवा समिति के अध्यक्ष पूरन सेलाल और महासचिव जगत सिंह दताल ने दारमा घाटी में तैनात 36वीं वाहिनी आईटीबीपी के डीआईजी एपीएस निंबाडिया से गांवों में जवानों को भेजकर नुकसान का जायजा लेने की गुहार लगाई थी। डीआईजी के निर्देश अनुसार आईटीबीपी के जवानों ने विषम परिस्थितियों में भी जाकर उच्च हिमालयी के 10 गांवों का निरीक्षण किया।
बर्फबारी से इन गांवों में हुआ है नुकसान
सीपू गांव में आठ मकान, एक स्कूल और चार सोलर लाइट, मार्छा में एक मकान, एक स्कूल और पांच सोलर लाइट, तीदांग में तीन मकान, ढाकर में आठ मकान और एक सोलर लाइट, गो में छह मकान, एक मंदिर और दो सोलर लाइट, बोन में दो मकान को क्षति पहुंची है जबकि एक लकड़ी का पुल बह गया। इस पुल के बहने से फिलम और बोन गांवों की आवाजाही में असर पड़ेगा। फिलम में चार मकान, सोन में चार मकान और दो सोलर लाइट, दांतू में 10 मकान और एक रैन सेल्टर, दुग्तू में 11 मकान, एक मंदिर को नुकसान पहुंचा है।