क्षेत्र पंचायत समिति की बृहस्पतिवार को हुई बैठक में जिलाधिकारी सी रविशंकर ने प्राथमिक स्कूल सेकली के शिक्षक का वेतन रोकने और शिक्षक के खिलाफ जांच के आदेश दे दिए। डीएम ने जनता की समस्याओं को अनसुना करने वाले अफसरों को सख्त कार्रवाई के लिए आगाह किया। बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ के नाम पर फार्म भराने के मामले में लोगों से कहा कि ऐसा करने वालों से सावधान रहें।
बीडीसी बैठक में पहुंचे डीएम के सामने सदस्यों ने सेकली प्राथमिक स्कूल की अव्यवस्था को रखते हुए कहा कि वहां तैनात एकमात्र शिक्षक स्कूल नहीं जाता। इस कारण 60 बच्चों की पढ़ाई चौपट हो गई है। कई दिनों तक स्कूल बंद रहता है। क्षेत्र प्रमुख नेत्र सिंह कुंवर की अध्यक्षता में हुई बैठक में पूरे विकासखंड की तरफ से मांग पत्र दिया गया। कहा गया कि आपदा की दृष्टि से संवेदनशील धारचूला विकासखंड में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, संचार की व्यवस्था दुरुस्त करने की जरूरत है। पांगला की प्रधान देवकी देवी ने कहा कि पांगला प्राथमिक विद्यालय में 70 बच्चे हैं, लेकिन एक ही अध्यापक है इसलिए मानकों के अनुसार अध्यापक बढ़ाए जाएं। खुम्ती की प्रधान विमला देवी ने कहा कि प्राथमिक विद्यालय सीपालथौड़ का भवन जर्जर हो चुका है, कभी भी गंभीर दुर्घटना घट सकती है। जिलाधिकारी ने एक सप्ताह के अंदर जांच टीम भेजकर आपदा मद से भवन बनाने का आश्वासन दिया।
राज्य आंदोलनकारी तारा भाट के पुत्र किशन सिंह ने कहा कि उत्तराखंड आंदोलन के लिए आजीवन नंगे पैर का व्रत रखने वाले उनके पिता तारा भाट को राज्य आंदोलनकारी की सूची में नहीं रखा गया है। जिला पंचायत सदस्य भूपेंद्र थापा ने जूनियर हाइस्कूल पंथागांव, जीआईसी एवं प्राथमिक विद्यालय ग्वालगांव में अध्यापकों और भवनों की कमी का मामला रखा। संयुक्त स्वास्थ्य केंद्र धारचूला में डॉक्टरों और तकनीशियनों की नियुक्ति की मांग भी उठी। बैठक में सीडीओ आशीष चौहान, जिला परियोजना निदेशक नरेश कुमार, उपजिलाधिकारी मनुज गोयल, सीएमओ डा. उषा गुंज्याल, उप प्रमुख सुंदर सिंह, कनिष्ठ प्रमुख दौलत सिंह, खंड विकास अधिकारी लक्ष्मण जोशी, तहसीलदार आईबी मल्ल, थानाध्यक्ष ध्यान सिंह, एनएचपीसी के जनसंपर्क अधिकारी भुवन जोशी आदि उपस्थित थे।
डीएम अपने वेतन से करें मनरेगा का भुगतान
क्षेत्र पंचायत सदस्य गोविंद ठगुन्ना ने बैठक में एक अजीब सा सवाल रखते हुए कहा कि मनरेगा का भुगतान जिलाधिकारी अपने वेतन से कर दें। जब उन्होंने यह बात रखी तो बैठक में सन्नाटा छा गया। ठगुन्ना ने कहा कि मनरेगा के तहत किए गए कार्यों का भुगतान एक वर्ष से लंबित है। मनरेगा में भुगतान के लिए यह कानून बना है कि मजदूरों को 15 दिन में भुगतान हो जाएगा। जब एक साल से कई मजदूरों को भुगतान नहीं हुआ तो डीएम साहब अपने वेतन से उनका भुगतान करा दें तो कृपा होगी।