पिथौरागढ़ जिले में पिछले तीन-चार वर्षों से साइबर ठग लोगों के लिए एक समस्या बन चुके हैं। भय, लालच और जानकारी के अभाव में पिथौरागढ़ जिले के लोगों को साइबर ठगों ने करीब एक करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की है। साइबर ठगी का शिकार होने वालों में सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी, सरकारी कर्मचारी और बैंक अधिकारी भी शामिल हैं।
जागरूकता की कमी के चलते साइबर ठग लोगों की गाढ़ी कमाई लूट रहे हैं। सीमांत जिला पिथौरागढ़ में जनवरी से अब तक साइबर ठगी के 662 मामले आए है। इसमें डिजिटल अरेस्ट के 19, ऑनलाइन गेमिंग के 23, फोटोज को अश्लील बनाकर वायरल करने के 39, फर्जी अधिकारी बनकर ठगी के 94 और ऑनलाइन निवेश के 142 मामले सहित अन्य मामलों में करीब एक करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई है। इनमें से साइबर पुलिस ने करीब 24 लाख रुपये की धनराशि वापस भी करवा दी है।
साइबर सेल के प्रभारी उपनिरीक्षक मनोज पांडेय ने बताया कि साइबर ठरों की बड़ी टीम इस मंच में सक्रिय रहती है, जो प्रतिदिन लाखों प्रोफाइल का विश्लेषण करती है। इंटरनेट मीडिया में डाले गए पोस्ट, फोटो और वीडियो से साइबर अपराधी व्यक्ति का पिछला रिकार्ड और उसकी वित्तीय स्थिति का अंदाजा लगाते हैं। जिले में सबसे अधिक ठगी के मामले निवेश और फर्जी पुलिस के डिजिटल अरेस्ट होने के नाम पर आ रहे हैं।
साइबर ठगी के लिए सावधानी बहुत जरूरी
इंटरनेट मीडिया पर लुभावने वाले विज्ञापनों के झांसे में आकर लोग ठगी के शिकार बना रहे हैं। लुभावने और धन दोगुना करने वालों के झांसे में फंसे तो साइबर ठग आपका खाता खाली कर देंगे। व्यक्तिगत और बैंक संबंधी जानकारी से किसी भी साझा न करें। व्हाट्सएप और संदेश में आने वाले लिंक न खोलें। सतर्कता ही साइबर ठगी का सबसे अच्छा बचाव है।
साइबर ठग नए-नए तरीके से लोगों को ठग रहे हैं। ज्यादातर लोग लालच और डर के कारण ठगी के शिकार हो रहे हैं। साइबर ठगी से बचने का सबसे सही तरीका जागरूकता है।
- रेखा यादव, एसपी पिथौरागढ़।