भारत-तिब्बत अंतरराष्ट्रीय स्थल व्यापार में चीन सरकार लगातार नए प्रतिबंध लगाती जा रही है। पहले गुड़, मिश्री के आयात पर रोक, फिर लिपुलेख दर्रे के पार घोड़ों के जाने में प्रतिबंध लगाने के बाद अब चीन सरकार ने तकलाकोट स्थित कृषि विकास बैंक से भारतीय व्यापारियों को मिलने वाली मुद्रा एक्सचेंज की व्यवस्था को भी इस बार से समाप्त कर दिया है। पिछले साल तक भारतीय व्यापारियों को इस बैंक के बदले युआन मिल जाती थी। मुद्रा एक्सचेंज की सुविधा समाप्त होने से भारतीय व्यापारियों ने इस बार वस्तु विनिमय के लिए ज्यादा मात्रा में सामान तकलाकोट तक पहुंचाया है।
भारत-तिब्बत व्यापार समिति के अध्यक्ष दौलत सिंह रायपा ने बताया कि तिब्बत में व्यापार को जाने वाले सीमांत के व्यापारियों के सामने हर बार नई मुसीबत पैदा होती जा रही है। 1992 में जब भारत-तिब्बत अंतरराष्ट्रीय स्थल व्यापार शुरू हुआ था, तब कहा गया था कि दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की प्रक्रिया में यह व्यापार बेहद अहम है, लेकिन अब लगातार नए प्रतिबंध लगने से व्यापारियों के सामने नई समस्या पैदा होती जा रही है। भारतीय व्यापारिक मंडी गुंजी में स्टेट बैंक की अस्थायी शाखा तो खुली है, लेकिन उसमें भी मुद्रा विनिमय की कोई सुविधा नहीं है। यदि गुंजी में ही रुपए के बदले युआन मिल जाता तो व्यापारियों को बड़ी राहत मिलती।
तकलाकोट से पांच व्यापारी लौटे
भारत-तिब्बत अंतरराष्ट्रीय स्थल व्यापार 2016 अब समापन की ओर है। तिब्बत की मंडी तकलाकोट से रविवार को पांच व्यापारी लौट आए हैं। अब तकलाकोट में सीमांत के कुल 31 व्यापारी रह गए हैं। यह सभी 31 अक्तूबर को लिपुलेख दर्रा पार कर भारतीय क्षेत्र में प्रवेश करेंगे। अब व्यापारी लौटने की तैयारी में जुट गए हैं।
एसडीएम बैठक में भाग लेने दिल्ली गए
भारत-तिब्बत व्यापार की समीक्षा के लिए 25 अक्तूबर को दिल्ली वाणिज्य मंत्रालय में होने वाली बैठक में भाग लेने के लिए एसडीएम आरके पांडे रविवार को रवाना हो गए। सीमांत के व्यापारियों का कहना है कि यदि एसडीएम दिल्ली जाने से पहले स्थानीय व्यापारियों से बात कर लेते तो उनको बैठक में रखने के लिए काफी फीडबैक मिल जाता।