पिथौरागढ़ जिले में सरकार ने अपनी व्यवस्था बनाने के लिए त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशासक तो नियुक्त कर दिया है लेकिन उन्हें वित्तीय अधिकार न मिलने से विकास कार्य ठप हो गए हैं। हालात यह हैं कि प्रशासकों को वित्तीय अधिकार न मिलने से गांवों के विकास के लिए मिले 60 करोड़ रुपये से अधिक सरकारी खातों में डंप हैं। स्थिति यह है कि प्रशासक वित्तीय अधिकार मिलने की और जिले की पांच लाख की आबादी विकास की राह देख रही है।
जिले में 881 ग्राम पंचायतें हैं। नगर की आबादी छोड़ दें तो इन ग्राम पंचायतों में पांच लाख की आबादी निवास करती है। गांवों के साथ ही जनता के विकास के लिए हर साल ग्राम पंचायतों को राज्य और 15वें वित्त के तहत आबादी के लिहाज तीन से 15 लाख रुपये की धनराशि मिलती है। विकास कार्यों में इस धन को खर्च करने के लिए प्रधान और ग्राम पंचायत विकास अधिकारी के संयुक्त हस्ताक्षर जरूरी होते हैं।
पंचायतों का कार्यकाल खत्म होने के बाद प्रधानों को प्रशासक तो नियुक्त किया गया लेकिन इन्हें वित्तीय अधिकारी नहीं दिए गए। ऐसे में जिले की सभी ग्राम पंचायतों के विकास के लिए मिले 54 करोड़ रुपये से अधिक सरकारी खातों में डंप हैं। इसी तरह जिला पंचायत को भी हर साल गांवों के विकास के लिए करीब 10 करोड़ रुपये का बजट मिलता है। राज्य और 15वें वित्त की पहली किस्त के तौर पर छह करोड़ रुपये जिला पंचायत को मिले हैं। प्रशासक को वित्तीय अधिकार न मिलने से इन धनराशि से विकास कार्य कराना जिला पंचायत के लिए मुश्किल हो गया है। यह धन भी सरकारी खाते में डंप हो गया है।
पंचायत प्रशासक अनुमति लेने से पीछे खींच रहे हाथ
पंचायती राज एक्ट के मुताबिक पंचायत प्रशासकों को विकास कार्यों के लिए बजट खर्च करने के लिए डीएम की अनुमति लेनी होती है लेकिन प्रशासक इससे हाथ पीछे खींच रहे हैं। प्रशासकों के मुताबिक यदि उन्होंने अनुमति लेकर विकास कार्य शुरू किए और काम पूरा होने से पहले ही त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की आचार संहिता लागू हो गई तो उनकी जेब से खर्च धन का भुगतान होना मुश्किल होगा। ऐसे में उन्हें नुकसान झेलना होगा।
चालू कामों का भुगतान हो रहा है। प्रशासकों को वित्तीय अधिकार न मिलने से बजट खर्च नहीं हो रहा है। उम्मीद है शासन स्तर पर इसमें कुछ संशोधन किया जाएगा। - हरीश चंद्र आर्या, जिला पंचायत राज अधिकारी, पिथौरागढ़
जिला पंचायत के प्रशासकों को वित्तीय अधिकार देने की अनुमति मांगी गई है ताकि विकास कार्य न रुकें। अनुमति के लिए पत्र शासन को भेजा गया है। इस पर शासन को ही निर्णय लेना है। - बीसी छिमवाल, अपर मुख्य अधिकारी, जिला पंचायत, पिथौरागढ़