प्रशासन की ओर से मिलम और नंदा देवी बेस कैंप तक ट्रैकिंग की अनुमति नहीं मिलने से आक्रोशित पर्यटकों ने एसडीएम कार्यालय पर प्रदर्शन किया। उनका कहना था कि जब तक उन्हें ट्रेकिंग मार्गों पर अनुमति नहीं मिलेगी तब तक वे मुनस्यारी नहीं छोड़ेंगे।
पिछले माह नंदा देवी आरोहण को गया विदेशी पर्यटकों का आठ सदस्यीय दल लापता हो गया था। इस दल के कुछ सदस्य हिमस्खलन की चपेट में भी आ गए थे। प्रशासन अब भी इन पर्वतारोहियों के शवों की खोज में जुटा हुआ है। इसके बाद से प्रशासन ने ट्रेकिंग की अनुमति देना बंद कर दी। इससे ट्रेकिंग व्यवसाय से जुड़े पोर्टर, पोनी और मजदूरों के समक्ष भी रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। वेसे भी मुनस्यारी से 64 किमी दूर मिलम ग्लेशियर तक का ट्रैक पर्यटकों को खासा पसंद है। क्षेत्र में पर्यटक गतिविधियों से इस समय करीब 700 लोग जुड़े हैं।
एसडीएम गौतम का कहना है कि नंदा देवी हादसे के बाद उक्त क्षेत्र में ट्रेकिंग पर रोक लगाई गई है। विरोध जताने वालों में महाराष्ट्र, दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा, गोवा आदि जगहों के विजय कुमार, मोहित शर्मा, विकास भौसले, रिचा पारीक, देवेंद्र, हितेश, धर्मेंद्र, कुलभूषण, प्रतीक पाटिल, प्राजक्ता, गंगा राम आदि शामिल रहे।
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मल्ला जोहार के ग्लेशियर में जाने पर भी प्रतिबंध, भूख हड़ताल की चेतावनी
पिथौरागढ़। मिलम ग्लेशियर ट्रेकिंग में प्रतिबंध हटाने की मांग को लेकर भाजपा के मुख्य मीडिया प्रभारी जगत मर्तोलिया ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने कहा है कि नंदा देवी क्षेत्र में हुए हादसे के बाद प्रशासन ने मल्ला जोहार के ग्लेशियर और बुग्यालों में जाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। अभी मौसम अनुकूल है और पर्यटकों को क्षेत्र में जाने से रोका जाना अनुचित है। प्रतिबंध से पर्यटन व्यवसाय के साथ ही स्थानीय युवाओं और मजदूरों को आर्थिक नुकसान हो रहा है। उन्होंने 23 जून तक प्रतिबंध नहीं हटाए जाने पर 24 से भूख हड़ताल की चेतावनी दी है।