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झूठी गवाही देने वाले पति-पत्नी के खिलाफ मामला दर्ज करने के निर्देश दिए

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पिथौरागढ़। दुष्कर्म के मामले में न्यायालय में झूठा शपथ पत्र और गवाही देना दंपति को महंगा पड़ गया। जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेंद्र जोशी ने पति-पत्नी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
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मुनस्यारी के एक गांव निवासी महिला के अनुसार 23 मई 2017 की शाम को एक युवक ने घर में घुसकर उसके साथ दुष्कर्म किया और किसी को बताने पर सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं देने और जान से मारने की धमकी दी। पति के लौटने पर महिला ने कमलेश नामक युवक पर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया। इस मामले में 24 मई को मुनस्यारी थाने में आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने महिला के बयान दर्ज करने के बाद मेडिकल कराया और फाइनल रिपोर्ट कोर्ट में पेश कर दी। इसके खिलाफ पति-पत्नी ने 23 अगस्त 2017 को न्यायालय में मामले की सुनवाई के लिए प्रार्थना पत्र दिया। पति ने भी पत्नी के बयानों का समर्थन किया। इसके बाद कोर्ट के निर्देश पर आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया और मामला न्यायालय में चला। सीआरपीसी की धारा 244 के तहत पति-पत्नी के बयान दर्ज हुए।
इस मामले में तीन मार्च को जिला एवं सत्र न्यायालय में जिरह हुई। इसमें महिला ने अपने बयान बदल दिए। महिला ने कहा कि उसके साथ दुष्कर्म हुआ था लेकिन कमलेश को वह नहीं जानती है। महिला के पति ने भी न्यायालय में कहा कि जिस दिन दुष्कर्म हुआ था उस दिन घर लौटने पर उसकी पत्नी ने उसे यह बात कही थी लेकिन उसने कोर्ट में यह बात नहीं बताई। जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेंद्र जोशी ने झूठे साक्ष्य देने पर दोनों के खिलाफ मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय में मुकदमा दायर करने के आदेश दिए हैं।
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