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Pithoragarh News: दहेज उत्पीड़न के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश ने सजा रखी बरकरार

Fri, 28 Feb 2025 10:46 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
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पिथौरागढ़। अपर सत्र न्यायाधीश गीता चौहान की अदालत ने दहेज उत्पीड़न के मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट सिविल जज (जूनियर डिविजन) गंगोलीहाट के फैसले को यथावत रखते हुए दोषियों की अपील खारिज कर दी है।
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मामले के अनुसार गंगोलीहाट थाने में एक विवाहिता की तहरीर पर वर्ष 2019 में दहेज उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज किया गया। पीड़िता के अनुसार उसका विवाह 20 जून 2017 को हिंदू रीति रिवाज के साथ लोहाकोट देवलथल क्षेत्र निवासी दीपेश रावत से हुआ। विवाह के मंडप में ही दूल्हे के परिजनों ने दो लाख रुपये की मांग रखी। गृह प्रवेश के समय सास ने सोने का हार नहीं होने पर खरी खोटी सुनाई। इसके बाद भी आए दिन उनके परिवार वाले उसे प्रताड़ित और धमकाते थे। पति भी उसके साथ शराब के नशे में मारपीट करता था। तहरीर के आधार पर पति और सास जीवंती रावत के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। मामले की विवेचना कर भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 498 ए, 504, 506 और दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1961 की धारा 3/4 के तहत न्यायालय में आरोप पत्र भेजा गया था। इस पर 11 जुलाई 2024 को न्यायिक मजिस्ट्रेट सिविल जज (जूनियर डिविजन) रजनीश मोहन की अदालत ने दहेज उत्पीड़न के दोषियों को दो वर्ष के साधारण कारावास और 17 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ दोष सिद्धों की ओर से अपर सत्र न्यायालय में अपील की गई। मामले की सुनवाई के बाद अपर सत्र न्यायाधीश ने न्यायिक मजिस्ट्रेट के फैसले काे यथावत रखते हुए अपील खारिज कर दी।
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