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पुरस्कार लेने नहीं जा सकीं कबूतरी देवी

Wed, 09 Nov 2016 10:18 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
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कबूतरी देवी - फोटो : अमर उजाला
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‘आज पानि झौं झौं, भोल पानि झौं झौं पोरकी तैं न्हे जूंला’ जैसे लोकप्रिय गीतों को गाने वाली 70 वर्षीय लोक गायिका कबूतरी देवी को इस बार उत्तराखंड सरकार ने लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया है, लेकिन स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों के कारण वह पुरस्कार लेने नहीं जा सकीं।
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विकासखंड मूनाकोट के क्वीतड़ गांव से फोन पर कबूतरी देवी ने कहा पुरस्कार लेने के लिए उन्होंने अपनी बेटी हेमा देवी को देहरादून भेजा है। खुद वह बेटी के साथ ही रहती हैं। कबूतरी देवी के कई गाने आकाशवाणी लखनऊ और नजीबाबाद से प्रसारित हो चुके हैं। उनके गीतों की खूब फरमाइश आती थी।

1985 में पति दीवानीराम की मौत के बाद कबूतरी देवी एक तरह से टूट गईं। वह गायन छोड़कर बच्चों के लालन-पालन में जुट गईं।

करीब 19 वर्ष तक गायन से वनवास के बाद 2006 में नवोदय पर्वतीय कला केंद्र के निदेशक हेमराज बिष्ट ने उनका वनवास तोड़ने का प्रयास किया। उनका एक कार्यक्रम उसी दौरान नैनीताल में रखा गया। मंच से लोगों ने जब उनकी खनकती आवाज सुनी तो कबूतरी देवी फिर चर्चा में आ गईं। बाद में उन्होंने अल्मोड़ा में भी कार्यक्रम पेश किया। पिथौरागढ़ में भी वह कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेती रही हैं। कबूतरी देवी का एक प्रसिद्ध गीत आज भी लोग गुनगुनाते हैं ‘हुड़कना को ठंडो पानी, चौपखिया को त्यार, कसिके मनाली ईजू बिन चेलि को त्यार’। एक अन्य गीत की भी फरमाइश होती थी-तातो पानी तातो बाना, ठंडो पानी कालिगंगा मूल में। उनके गीतों में पहाड़ का दर्द छिपा है।
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एक गीत में उन्होंने पहाड़ की इसी सच्चाई को सामने लाने का प्रयास किया-हिमाला ह्यूं को फूलो, पातल क्वैराल फूलो, पहाड़ नै जूंला, भागवे भाबर नि जाए, माछर लागला मुरा, पहाड़ को ठंडो पाणी, सुणकस मीठी वाणी, छोड़नी नि लागनी। कबूतरी देवी ने बताया कि उनको सरकार की ओर से तीन हजार रुपए प्रतिमाह पेंशन मिलती है। अब स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता। इस कारण कार्यक्रमों में भाग नहीं ले पाती। प्रदेश सरकार की ओर से दिए गए सम्मान से वह काफी खुश हैं।
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