आंवलाघाट पेयजल योजना का इनफिल्टरेशन वेल
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शहर वालों की पानी की समस्या को दूर करने के लिए बनाई गई आंवलाघाट पेयजल योजना में धांधली की पुष्टि हुई है। इस पर पेयजल मंत्री प्रकाश पंत ने योजना के दोनों ठेकेदारों को काली सूची में डाल दिया है। अधिकारियों को चार्जशीट दी जा रही है। जल्द ही पेयजल निगम के अधिकारियोें पर गाज गिर सकती है। शासन ने डीएम की जांच को आधार बनाया है।
शनिवार को फोन पर अमर उजाला से हुई बातचीत में पेयजल मंत्री एवं स्थानीय विधायक प्रकाश पंत ने कहा कि योजना में संफ (इनफिल्टरेशन वेल) गलत स्थान पर बनाने की पुष्टि हुई है। संफ से गंदा पानी आ रहा है। योजना में बार-बार ब्रेकडाउन हो रहा है। इसमें यांत्रिकी विभाग की लापरवाही सामने आई है। पाइप घटिया क्वालिटी के लगाने के साथ ही पाइप खुले में बिछे होने की पुष्टि हुई है। मंत्री ने कहा कि पंप के मोटर घटिया क्वालिटी के लगाने की बात सामने आई है। उन्होंने कहा कि योजना बनाने वाले दोनों ठेकेदारों को काली सूची में डाल दिया गया है। लापरवाही के लिए संबंधित अधिकारियों को चार्जशीट दी जा रही है।
मंत्री ने कहा कि छह माह पहले तत्कालीन डीएम सी रविशंकर ने योजना की जांच की थी। जांच में खामियां सामने आई थीं। खामियों को दूर करने के लिए अधिकारियों और ठेकेदार को छह महीने का समय दिया गया था, लेकिन खामियों को दूर करने के लिए कोई कदम नहीं उठाए गए। कहा कि पेयजल योजना की जांच नियोजन विभाग से कराई जा रही है। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
क्षमता के अनुसार आपूर्ति नहीं कर पा रही आंवलाघाट योजना
धांधली के चलते 74 करोड़ लागत की आंवलाघाट पेयजल योजना क्षमता के अनुसार पानी की आपूर्ति नहीं कर पा रही है। 12 एमएलडी की इस योजना से शुरुआत में 6 एमएलडी पानी मिलने का दावा किया गया था। अप्रैल 2018 में इस योजना को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जनता को समर्पित किया था, लेकिन तब से अब तक योजना से कभी भी ढाई-तीन एमएलडी से अधिक पानी नहीं मिल पाया। इसका खामियाजा शहर की 65000 आबादी भुगत रही है। इस योजना से जिला मुख्यालय के साथ ही आसपास के गांवों को भी पानी दिया जाना था, योजना शहर के लोगों को ही पर्याप्त पानी नहीं दे पा रही है।
पहले पाया पुरस्कार, अब चार्जशीट की तैयारी
आंवलाघाट पेयजल योजना का निर्माण लागत से कम रकम में करने के लिए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पेयजल निगम के अधिशासी अभियंता रंजीत धर्मशक्तू को योजना के उद्घाटन अवसर पर सम्मानित किया था। कहा गया था कि 79 करोड़ की लागत की योजना को 74 करोड़ रुपये में बना दिया गया। योजना की खामियों को देखते हुए पेयजल निगम के ईई को सम्मानित करने का फैसला जल्दबाजी में लिया गया निर्णय साबित हुआ है। लिहाजा, अब विभागीय अधिकारियों को चार्जशीट देने की तैयारी की जा रही है।