पंचेश्वर बांध निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ-साथ डूब क्षेत्र के सबसे बड़े बाजार झूलाघाट और इससे लगे दर्जनों गांवों के लोगों ने विरोध भी शुरू कर दिया है। रविवार को झूलाघाट में डूब क्षेत्र में आने वाले कई गांवों के लोगों ने पंचेश्वर बांध के विरोध में समिति का गठन किया और पंचेश्वर बांध का पुरजोर विरोध करने का फैसला लिया है।
पंचेश्वर बांध के विरोध के संबंध में लोक निर्माण विभाग के डाक बंगले में बैठक हुई। इसमें स्थानीय लोगों के अलावा महाकाली के किनारे स्थित डूब क्षेत्र में आने वाले कानड़ी, गेठिगाड़ा, सीमू, बलतड़ी सहित कई गांवों के लोगों ने हिस्सा लिया। बैठक का संचालन करते हुए समिति के प्रवक्ता कैलाश भट्ट ने कहा कि पंचेश्वर बांध से नदी घाटी क्षेत्र की उपजाऊ जमीन डूब जाएगी। क्षेत्र में बेरोजगारी बढ़ेगी और लोगों को मातृभूमि से बिछड़ने की बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। पंचेश्वर बांध डूब क्षेत्र समिति के सचिव दिवाकर भट्ट ने कहा कि पंचेश्वर बांध के प्रस्ताव के कारण पूरे क्षेत्र का विकास 50 वर्षों से ठप पड़ा है। इस कारण भारत-नेपाल के बीच मोटर पुल, टनकपुर-जौलजीबी सड़क के निर्माण जैसे कई काम रुके हैं। समिति की उपाध्यक्ष अंजली कुमारी ने कहा कि क्षेत्र के लोग छोटे बांध के पक्षधर हैं, जिससे कि कम क्षेत्र प्रभावित होने के साथ-साथ विद्युत उत्पादन और पर्यटन का विकास हो सके।
क्षेत्र के लोगों ने एक स्वर से सही विस्थापन, निवास के लिए भवन, परिवार में कम से कम 2 लोगों को सरकारी क्षेत्र में रोजगार, जमीन की उचित कीमत न मिलने पर बांध का पूरी शक्ति के साथ विरोध करने का फैसला लिया है। अब तक सरकार ने जहां भी बांध बनाए हैं, लोगों को जमीन का उचित मुआवजा तक नहीं दिया गया है। सरकार सिर्फ लोगों के घरों को उजाड़ कर बांध बनाने के बारे में सोचेगी तो लोग सड़कों पर उतर जाएंगे।
बैठक में मजिरकांडा के ग्राम प्रधान सुरेंद्र आर्या, बलतड़ी के ग्राम प्रधान गोपी राम, कानड़ी के ग्राम प्रधान लक्ष्मण चंद, गेठिगाड़ा के पुष्कर सिंह गोबाड़ी, राजू भंडारी, भीम सिंह गोबाड़ी, खीम सिंह गोबाड़ी, देव राम, योगेश धारियाल, मोतीराम कलखुड़िया, दयानिधि कलखुड़िया, धर्मानंद नरियाल, कोमलानंद जोशी, जानकी कापड़ी, शंकर भट्ट, भुवन पंगरिया, भगवान सिंह, कमल चंद, शंकर सिंह आदि मौजूद थे।