पिथौरागढ़। सीमांत जिले में शुक्रवार से बटरफ्लाई काउंट सीजन-छह में नई तितलियों को खोजने का कार्य शुरू होगा। वन विभाग के सहयोग से विंग्स फाउंडेशन रंग-बिरंगी तितलियों की खोज कर गणना करेगा। साथ ही स्कूली बच्चों को वनाग्नि और उससे होने वाले नुकसान के बारे में जागरूक किया जाएगा।
पिथौरागढ़ जिले के कई जंगल जैव विविधता से परिपूर्ण हैं। यहां मन को लुभाने वाली तितलियों का अनूठा संसार बसा है। विंग्स फाउंडेशन के निदेशक जगदीश भट्ट ने बताया कि काउंट पांच सीजन तक जिले में 182 तितलियों की प्रजातियां मिली हैं। इस सीजन में सभी जगहों पर वन विभाग और फाउंडेशन के सदस्य तितलियों की गणना करेंगे। इसमें अन्य प्रतिभागी भी हिस्सा लेकर तितलियों की फोटो 97562-02345 पर या wingssfoundationgmail.com पर भेज सकते हैं।
भट्ट ने तितलियों के अनूठे संसार पर एक किताब भी लिखी है। उन्होंने बताया कि कई तितलियां इस सीजन में अपने अंडे होस्ट प्लांट में देती हैं। यही सीजन वनों में आग लगने का भी होता है। आग से तितलियों की प्रजातियों पर असर पड़ा है।
कोट:
बटरफ्लाई काउंट सीजन- छह में नई तितलियों को ढूंढने का प्रयास किया जाएगा। इन तितलियों की जानकारी लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। - आशुतोष सिंह, प्रभागीय वनाधिकारी पिथौरागढ़।
दो दशक बाद सुंई के सातखाल तोक में आया गिद्धों का झुंड
20 साल बाद गांव में देखे गए गिद्ध, 50 से अधिक संख्या में पहुंचे
संवाद न्यूज एजेंसी
लोहाघाट (चंपावत)। विकासखंड के ग्राम पंचायत सुंई पऊ के सातखाल तोक में लंबे समय बाद विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुके गिद्धों का झुंड आने से उन्हें देखने के लिए लोगों का तांता लग गया। बड़े-बड़े गिद्धों को देखकर बच्चे काफी उत्सुक दिखे।
गांव के बुजुर्ग केशव दत्त चौबे, दया किशन चौबे और उर्वा दत्त चौबे ने बताया कि करीब दो-तीन दशक पूर्व जब किसी जानवर की मृत्यु हो जाती थी तो उन्हें खुले में फेंक दिया जाता था, तब अक्सर गिद्धों के झुंड के झुंड दिखाई देते थे। कई वर्षों बाद गिद्धों का एक झुंड सातखाल तोक के खेतों में एक मरे जानवर को खाने के लिए पहुंचा।
झुंड में 50 से अधिक छोटे-बड़े गिद्ध थे। उन्होंने बताया कि लगभग 20 साल बाद गांव में गिद्ध दिखाई दिए। इधर पशु चिकित्सालय के फार्मासिस्ट जनक चंद ने बताया कि बीमार पशुओं के इलाज में डिक्लोफेनाक इंजेक्शन का प्रयोग किया जाता था। यह दवा पशुओं के मांस में जमा हो जाती है। ऐसा माना जाता है कि बीमारी के चलते जब कोई पशु मर जाता है तो उसे गिद्ध खाया करते थे। पशुओं के मांस में डिक्लोफेनाक दवा होने से उन पर अपना असर डालती थी और उनकी मृत्यु हो जाती है।
पंचाचूली की तलहटी में मिली मृत ब्लू शीप की खाल
धारचूला (पिथौरागढ़)। उच्च हिमालयी क्षेत्र दारमा घाटी के पंचाचूली ग्लेशियर के दांतू गांव की ओर मृत ब्लू शीप (भरल) की खाल मिली है। इससे क्षेत्र के ग्रामीणों में काफी नाराजगी है। ग्रामीणों ने ब्लू शीप की गोली मारकर हत्या करने की आशंका जताते हुए वन विभाग से जांच करने की मांग की है।
दारमा घाटी के गांवों में बर्फ कम होने के कारण शिकारियों की चहलकदमी बढ़ गई है। 10 दिन पूर्व कुछ ग्रामीणों ने पंचाचूली ग्लेशियर की तलहटी और अन्य जगहों पर शिकारियाें की ओर से गोलियां चलाने की आवाज सुनी थी। मंगलवार को कुछ लोगों को एक स्थान पर ब्लू शीप की खाल मिली। ग्रामीणों ने शिकारियों के सक्रिय होने की आशंका जताते हुए वन विभाग से कार्रवाई की मांग की है।
ग्राम प्रधान दांतू जमन दताल ने वन्यजीवों की हत्या को बेहद निंदनीय बताया। उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों से टीम भेजकर शिकारियों को दबोचने और उचित कार्रवाई की मांग की है। बता दें कि दारमा घाटी के जंगलों में हिम तेंदुआ, ब्लू शीप, रेड फॉक्स, हिमालयी थार, घुरल आदि विलुप्त होते दुर्लभ प्रजाति के वन्यजीव पाए जाते हैं। इनकी तलाश में शिकारी गर्मियों में बर्फ पिघलते ही इन जानवरों का शिकार करने के लिए उच्च हिमालयी क्षेत्र में पहुंचते हैं।
इस मामले में पूर्व आईएफएस और राज्य वन्यजीव बोर्ड के सदस्य बिशन सिंह बोनाल का कहना है कि दारमा घाटी में शिकारियों की ओर से वन्यजीव हत्या की जानकारी मिली है। इस बारे में डीएफओ को सूचना देते हुए उचित कार्रवाई करने को कहा गया है।
कोट
शिकारियों की धरपकड़ के लिए दारमा घाटी में टीम भेजी जाएगी। साथ ही क्षेत्र में गश्त की जाएगी। वन्यजीव की हत्या में जो भी शामिल होगा, उसके पकड़े जाने पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत कार्रवाई की जाएगी। - आशुतोष सिंह, डीएफओ, पिथौरागढ़।