बड़ालू अस्पताल के बाहर बैठे नारायण चंद
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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बड़ालू के हाल खराब है। अस्पताल में ग्रामीणों का मामूली इलाज तक नहीं हो पा रहा है। नतीजतन लोगों को इलाज के लिए निजी अस्पताल की दौड़ लगानी पड़ रही है। रविवार को भी ऐसा ही हुआ। अस्पताल में कोई डॉक्टर नहीं होने से एक मरीज को निजी अस्पताल में इलाज कराना पड़ा। परेशान ग्रामीणों ने व्यवस्थाओं में सुधार नहीं होने पर सीएमओ कार्यालय में तालाबंदी का ऐलान किया है।
स्थानीय निवासी रवींद्र कुमार और नरेंद्र कुमार ने बताया कि रविवार को बड़ालू निवासी नारायण चंद का दरांती से हाथ कट गया। इलाज के लिए नारायण चंद्र सरकारी अस्पताल पहुंचे, लेकिन उन्हें अस्पताल बंद मिला। मजबूर होकर उन्हें निजी अस्पताल में इलाज कराना पड़ा। उन्होंने बताया कि एक साल पहले अस्पताल में अव्यवस्थाओं को लेकर ग्रामीणों ने आंदोलन किया था। तब सीएमओ और स्थानीय लोगों के बीच हुई बैठक में तय हुआ था कि डॉक्टर और अन्य कर्मचारी 24 घंटे अस्पताल परिसर में बने आवासीय भवन में रहेंगे।
कुछ दिनों तक सब ठीक चला, लेकिन फिर अव्यवस्थाएं हावी हो गई। बृजेश जोशी, अवनीश जोशी, सुनील कुमार समेत कई ग्रामीणों ने डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों को चौबीसों घंटे अस्पताल में उपलब्ध कराने की मांग की है। ऐसा नहीं किए जाने पर उन्होंने सीएमओ कार्यालय में तालाबंदी करने का ऐलान किया है।
बड़ालू अस्पताल में तीन डॉक्टर, फार्मेसिस्ट, स्टाफ नर्स और वार्ड ब्वाय तैनात हैं। 28 अप्रैल को अस्पताल को पत्र भेजकर 24 घंटे मौजूद रहने के निर्देश दिए हैं। अवहेलना करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ.उषा गुंज्याल, सीएमओ, पिथौरागढ़।