पिथौरागढ़। सीमांत जिले के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इस वर्ष पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेज का संचालन शुरू करने के नेताओं-अफसरों ने दावे किए गए थे लेकिन राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) की निरीक्षण रिपोर्ट ने इन तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
फैकल्टी की भारी कमी, अधूरा निर्माण और आवश्यक चिकित्सा संसाधनों के अभाव के चलते मेडिकल कॉलेज को मान्यता नहीं मिल सकी है। मेडिकल कॉलेज में 85 फैकल्टी पदों के सापेक्ष अब तक 10 से अधिक बार साक्षात्कार आयोजित किए जा चुके हैं, लेकिन केवल छह फैकल्टी की नियुक्ति हो सकी है।
इसके अलावा कॉलेज में पैथोलॉजी लैब और ऑपरेशन थिएटर (ओटी) जैसी मूलभूत सुविधाएं भी अब तक उपलब्ध नहीं हैं। एनएमसी ने सवाल उठाया है कि यदि इसी वर्ष एमबीबीएस की 100 सीटों पर प्रवेश दिया जाता है तो छात्रों को पढ़ाएगा कौन और आवश्यक संसाधनों के बिना मरीजों का उपचार कैसे होगा।
एनएमसी के मान्यता नहीं देने के फैसले के बाद विपक्ष सरकार पर हमलावर है जबकि सत्तापक्ष का दावा है कि आयोग की ओर से बताई गई सभी कमियां एक माह के भीतर दूर कर दी जाएंगी।