डीडीहाट के किरौली स्कूल में छाता लेकर पढ़ाई करते छात्र-छात्राएं
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शिक्षा विभाग के भी हाल निराले हैं। कहीं बच्चों के बैठने की व्यवस्था नहीं तो कहीं छत नहीं। जहां छत है, उसके हाल इतने बुरे हैं कि बारिश में नौनिहाल हाथ में छाता थामकर भविष्य बना रहे हैं।
तहसील मुख्यालय से करीब 15 किमी दूर स्थित राजकीय जूनियर हाईस्कूल किरौली का भवन काफी जीर्णशीर्ण हालत में है। वर्ष 1986 में विद्यालय भवन का निर्माण किया गया। उसके बाद अब तक किसी ने इसकी सुध नहीं ली। विद्यालय में चार कक्ष और दो आफिस कक्ष हैं। विद्यालय भवन की छत पर पत्थर रखकर जैसे-तैसे कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है। वर्तमान में विद्यालय में 29 छात्र, छात्राएं अध्ययनरत हैं। भवन के दरवाजे, खिड़कियों की लकड़ी गल चुकी है। दीवारें भी क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। बारिश में छात्र, छात्राएं हाथ में छाता लेकर पढ़ाई करने को विवश हैं।
भवन की खस्ता हालत को देखते हुए विद्यालय प्रबंधन समिति की बैठक आयोजित कर विद्यालय भवन का निर्माण शीघ्र कराने का प्रस्ताव पारित किया गया है। अभिभावकों का कहना है कि ऐसे में बच्चे कैसे पढ़ाई कर पाएंगे। प्रधानाचार्या भागीरथी कन्याल ने बताया कि विगत दिनों शैक्षिक कार्यक्रम के दौरान एसडीएम वैभव गुप्ता और जिला शिक्षाधिकारी डॉ. एके गुंसाई के समक्ष स्कूल भवन का मामला उठाया गया है। बताया कि विद्यालय भवन के लिए प्रस्ताव भेजा जा रहा है। राजस्व उप निरीक्षक एम प्रकाश ने क्षतिग्रस्त विद्यालय की रिपोर्ट तहसील प्रशासन को सौंप दी है। बैठक में सुनीता देवी, पुष्पा देवी, चंपा, गंगा देवी, गोविंद सिंह, पुष्पा, महेश राम, हरीश राम, कुंदन राम आदि थे।