पिथौरागढ़। जिले में जिला अस्पताल और महिला अस्पताल को छोड़कर किसी भी अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है। कोविड की तीसरी लहर में जिले में नौ साल तक के 65 हजार से अधिक बच्चों की सेहत का जिम्मा मात्र तीन बाल रोग विशेषज्ञों पर रहेगा। जिले में तैनात तीन बाल रोग विशेषज्ञों में एक जिला अस्पताल और दो महिला अस्पताल में कार्यरत हैं।
महिला अस्पताल में सीएमएस डॉ. जीएस नबियाल एक अन्य बाल रोग विशेषज्ञ की (संविदा) पर तैनाती हुई है। जिले के धारचूला और मुनस्यारी ब्लॉक के लोगों को बच्चों के उपचार के लिए सौ किलोमीटर दूर स्थित जिला अस्पताल में ही आना पड़ता है।
स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना की तीसरी लहर से निपटने के लिए जरूरी तैयारियां पूरी कर लीं हैं। इसके लिए जिला अस्पताल, महिला अस्पताल, नर्सिंग कॉलेज, गंगोलीहाट, डीडीहाट में बच्चा वार्ड बनाए गए हैं। इस वार्डों में सभी जरूरी उपकरण उपलब्ध करा दिए गए हैं।
सीएमओ डॉ. एचसी पंत ने बताया कि जिला अस्पताल के 10 आईसीयू बेड का चाइल्ड वार्ड बनाया गया है। दो डॉक्टरों की तैनाती की गई है। जिला महिला अस्पताल में चार न्यू बॉर्न स्टेबलाइज यूनिट (एनबीएसयू), गंगोलीहाट और डीडीहाट में चार-चार बेड के एनबीएसयू बेड बनाए गए हैं।
नर्सिंग कॉलेज में 50 बेड बच्चों और 50 बेड उनके अभिभावकों के लिए बनाए गए हैं। इन जगहों पर जरूरी उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। बेड़ीनाग और मुनस्यारी में चार-चार बेड के एनबीएसयू वार्ड बनाए गए हैं।
चार वेंटिलेटर बढ़ाए जाएंगे
पिथौरागढ़। तीसरी लहर के लिए जिला अस्पताल में 10 वेंटिलेटर से काम किया जाएगा। सीएमओ डॉ. एचसी पंत ने बताया कि जिला अस्पताल में छह वेंटिलेटर संचालित हैं।
अब कोविड की तीसरी लहर के लिए चार और वेंटिलेटर लगाए जा रहे हैं। 40 वेंटिलेटर विभाग के पास हैं। इनमें से 24 नर्सिंग कॉलेज के लिए हैं। छह जिला अस्पताल और 10 अन्य ब्लॉकों में हैं।
माइग्रेशन गांव के लोगों के लिए बच्चों का उपचार कराना चुनौती
मुनस्यारी/धारचूला। मुनस्यारी और धारचूला ब्लॉक के माइग्रेशन गांव के लोगों के लिए बच्चों का उपचार कराना आसान नहीं होगा। अगर तीसरी लहर सीमांत जिले में अधिक सक्रिय रहती है तो माइग्रेशन गांवों के परिवारों को बच्चों के उपचार के लिए मुनस्यारी ही आना होगा।
मल्ला जोहार के माइग्रेशन गांव रालम, मिलम, बिलजू, पाछू, बूर्फू, मर्तोली, लास्पा, टोला, खिलांच, मापा, गनघर, ल्वां, रेलकोट के लोगों को 25 से 80 किमी और धारचूला ब्लॉक के दारमा और व्यास घाटी के 21 माइग्रेशन गांव के लोगों की भी ऐसे ही हालत होंगे। यहां कोई बच्चा बीमार होता है तो उसे नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचने के लिए 35 से 120 किमी की यात्रा करनी होगी।
महिला अस्पताल में पिछले तीन माह में 41 गंभीर बच्चों को हायर सेंटर रेफर किया गया है। उन्हीं बच्चों को हायर सेंटर रेफर किया जाता है तो जब स्थिति गंभीर हो जाती है। इसमें ज्यादातर मुनस्यारी और धारचूला क्षेत्र के आने वाले बच्चे शामिल हैं। अस्पताल में प्रतिदिन 20 बच्चों का उपचार होता है, जबकि नवजात बच्चों के लिए सिर्फ चार बेड ही उपलब्ध हैं।
- डॉ. जेएस नबियाल, बाल रोग विशेषज्ञ।
जिले के 70 हजार बच्चों के लिए तीन बाल रोग विशेषज्ञ
चंपावत। कोरोना की संभावित तीसरी लहर का सबसे ज्यादा खतरा बच्चों पर माना जा रहा है। इस पर उच्च न्यायालय तक चिंता जता चुका है।
स्वास्थ्य विभाग ने जिला अस्पताल में बच्चों पर कोरोना की संभावित मार से बचाव की तैयारी तेज की है। जिला अस्पताल में बच्चों के लिए 11 बेड आरक्षित किए गए हैं।
जिले के 10 साल से कम उम्र के करीब 70 हजार बच्चों के लिए तीनों प्रमुख अस्पतालों में बाल रोग विशेषज्ञ भी हैं, लेकिन जिला अस्पताल में न्यू बॉर्न इस्टेबलाइजेशन यूनिट (एनबीएसयू) नहीं है।
पीएमएस डॉ. आरके जोशी ने बताया कि कोरोना के वार से बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए जिला अस्पताल में बच्चों के लिए नौ बेड का विशेष कक्ष बनाया गया है। ये सभी बेड ऑक्सीजन सुविधा वाले हैं।
छह बेड वाले आईसीयू में बच्चों के लिए दो बेड आरक्षित हैं। जिला अस्पताल में चार वेंटिलेटर, ऑक्सीजन प्लांट और 108 ऑक्सीजन सिलिंडर हैं। जिले के दोनों (टनकपुर और लोहाघाट) उप जिला अस्पताल में एनबीएसयू होने के अलावा बाल रोग विशेषज्ञ भी हैं।
सीएमओ डॉ. आरपी खंडूरी ने बताया कि लोहाघाट के डॉ. अंकुश बाठला बाकायदा कोरोना महामारी की संभावित तीसरी लहर से बचाव के लिए राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर से छह दिनी प्रशिक्षण भी ले चुके हैं, जबकि चंपावत के डॉ. विवेक सिंह और टनकपुर के डॉ. घनश्याम तिवारी अगस्त में हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में प्रशिक्षण लेंगे।
ऑक्सीजन प्लांट के अलावा ऑक्सीजन के 677 सिलिंडर
चंपावत। चंपावत जिले में ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट के अलावा 677 ऑक्सीजन सिलिंडर हैं। सीएमओ डॉ. आरपी खंडूरी का कहना है कि जिले में ऑक्सीजन सिलिंडर पर्याप्त हैं। बताया कि जिले के सरकारी अस्पतालों में 232 जंबो और 445 छोटे सिलिंडर हैं। निजी अस्पतालों में 19 बड़े और 48 छोटे ऑक्सीजन सिलिंडर हैं।
टनकपुर में स्पेशन न्यू बॉर्न केयर यूनिट भी नहीं
टनकपुर (चंपावत)। जिले के मैदानी क्षेत्र में बच्चों का इलाज सरकारी अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ के हवाले है। अस्पताल में फिलहाल न तो एसएनसीयू (स्पेशल न्यू बॉर्न केयर यूनिट) यूनिट है और न ही वेंटिलेटर की सुविधा। निजी अस्पतालों में भी बच्चों के इलाज की व्यवस्था न होने से इलाज के लिए बच्चों को दूसरे शहरों में जाना पड़ता है।
बनबसा से लेकर चल्थी तक के क्षेत्र के लोग उपचार के लिए टनकपुर आते हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. घनश्याम तिवारी ने बताया कि अस्पताल में रोजाना औसतन 10 से 12 बच्चे आते हैं। वहीं कोविड की तीसरी लहर में बच्चों के इलाज के लिए ट्रॉमा सेंटर भवन में आईसीयू सहित गहन चिकित्सा सुविधा से युक्त 10 बेड का डेडिकेटेड वार्ड बनाया जा रहा है।
लोहाघाट में खराब है एनबीएसयू की एक मशीन
लोहाघाट (चंपावत)। उप जिला अस्पताल में इन दिनों औसतन रोज 25 से 30 बच्चों का इलाज हो रहा है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अंकुश बाटला ने बताया कि ज्यादातर बच्चों में मौसम के बदलाव से संबंधित दिक्कतें हैं।
एमएस डॉ. जुनैद कमर का कहना है कि कोरोना की तीसरी लहर से निपटने के लिए जरूरी तैयारी की जा रही है। बच्चों को अचानक सांस लेने में दिक्कत होने पर पांच एंबुबैग हैं। बच्चों के लिए वेंटिलेटर आदि कई जरूरी सुविधाओं के लिए जरूरी उपकरणों की मांग भेजी गई है। लोहाघाट में लगी एनबीएसयू की चार में से एक मशीन खराब है।
चंपावत में कोरोना संक्रमित हो चुके सात बच्चे
चंपावत चंपावत जिले में पिछले साल कोरोना संक्रमण की चपेट में सात बच्चे भी आए। चंपावत के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विवेक सिंह ने बताया कि दो से नौ साल तक के सात बच्चों को कोरोना संक्रमण हुआ था। बाद में ये सभी बच्चे ठीक हो गए।