फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कम उम्र में ही नंदादेवी बेस कैंप पहुंचे चेतन

Fri, 27 Oct 2017 10:34 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
विज्ञापन
ब्रिटिश ट्रैकर दल के साथ चेतन बृजवाल - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
नंदादेवी टूर एंड ट्रैक के संचालक बीरू बृजवाल के 13 वर्षीय पुत्र एवं विवेकानंद विद्या मंदिर इंटर कॉलेज के 8वीं कक्षा के छात्र चेतन बृजवाल ने मिलम और नंदादेवी बेस कैंप तक पहुंचने का रिकार्ड बनाया है। चेतन ने 11 दिन में 154 किमी पैदल दूरी तय की। इससे पहले वर्ष 2014 में पश्चिम बंगाल के हुगली के 14 वर्षीय तरुण भट्टाचार्य को नंदादेवी बेस कैंप पहुंचने में कामयाबी मिली थी। तरुण अपने माता-पिता के साथ नंदादेवी बेस कैंप गए थे।
विज्ञापन


ब्रिटेन के आठ सदस्यीय ट्रैकिंग दल के टीम लीडर ध्रुव जोशी और राजीव रावत के नेतृत्व में विद्या मंदिर के कक्षा 8 के छात्र चेतन बृजवाल को अंग्रेजी अनुवादक के तौर पर इस दल में शामिल किया गया था, लेकिन चेतन ने अपना मूल काम करने के साथ-साथ ट्रैकिंग में भी रिकार्ड कायम कर लिया। ब्रिटेन की एक्सोडस कंपनी के 8 सदस्यों का ट्रैकिंग दल 15 अक्तूबर को नंदादेवी बेस कैंप को रवाना हुआ था। शुक्रवार को यह दल मुनस्यारी वापस आ गया है। अंग्रेज ट्रैकरों को चेतन ने अपनी प्रतिभा से बेहद प्रभावित किया।

उसे पर्यटकों ने इनाम भी दिए। चेतन ने बताया कि 154 किलोमीटर के इस सफर में कुछ स्थानों पर दिक्कतें भी आई। ठंड ज्यादा होने और ऊंचाई वाले स्थानों पर आक्सीजन की कमी होने से कई बार परेशानी हुई, लेकिन मजबूत इच्छाशक्ति और धैर्य से वह नंदादेवी बेस कैंप पहुंचने में सफल हो गए। चेतन बृजवाल शिलारोहण, रिवर रॉफ्टिंग, कयाकिंग का प्रशिक्षण ले चुके हैं। उनका लक्ष्य पर्वतारोही बनने का है। चेतन ने बताया कि ताजा अभियान के दौरान उन्होंने विदेशी पर्यटकों को हिमालय बचाओ की शपथ दिलाई और 4100 मीटर की ऊंचाई पर सफाई अभियान भी चलाया।
विज्ञापन


चेतन का विद्यालय में अभिनंदन
मुनस्यारी। विवेकानंद विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में शुक्रवार को चेतन बृजवाल का अभिनंदन हुआ। कार्यक्रम में चेतन के पिता बीरू बृजवाल और माता नीतू बृजवाल भी उपस्थित रहीं। प्रधानाचार्य भगत सिंह बोरा ने कहा कि चेतन ने जो रिकार्ड बनाया है, उससे विद्यालय का नाम रोशन हुआ है। उन्होंने कहा कि चेतन के जज्बे को देखकर यही लगता है कि वह आने वाले समय में प्रख्यात पर्वतारोही बनेगा। इस दौरान चेतन ने अभियान के दौरान के अनुभव सुनाए। चेतन ने कहा कि पर्वतारोहण और ट्रैकिंग अभियानों के दौरान थोड़ी कठिनाई तो जरूर होती है, लेकिन इन कठिनाइयों से घबराने की जरूरत नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें