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जीएसटी का असर:त्रिपुरासुंदरी मेले में नहीं दिखेगा भारतीय सामान

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झूलाघाट (पिथौरागढ़)। नेपाल के विख्यात त्रिपुरा सुंदरी मेले में इस वर्ष कोई भी भारतीय व्यापारी नहीं पहुंच पाया है। कस्टम विभाग ने बिना आईजीएसटी के नेपाल के लिए किसी प्रकार का सामान ले जाने पर रोक लगा दी है। त्रिपुरासुंदरी मेला शुक्रवार से शुरू होगा और मेला स्थल पर बृहस्पतिवार से ही दुकानें लग गई हैं। पिछले साल तक मथुरा के मिठाई वाले, मुरादाबाद के बर्तनों के व्यापारी मेला शुरू होने से दो तीन दिन पहले ही त्रिपुरासुंदरी मेले में पहुंच जाते थे लेकिन इस बार मेले में भारतीय सामान नजर नहीं आएगा।

जुलाई में जीएसटी लगने के बाद से नेपाल को सामान ले जाने में अड़चनें आने लगी थी। 19 अक्तूबर को कस्टम विभाग ने बाकायदा एक आदेश जारी कर कहा कि नेपाल सामान ले जाने के लिए व्यापारी का अंतरराष्ट्रीय वस्तु सेवा कर (आईजीएसटी) में पंजीकरण होना जरूरी है। उसके बाद कई व्यापारियों का सामान वापस लौटा दिया गया था। झूलाघाट के व्यापारियों का कहना है कि कस्टम विभाग मनमाने आदेश जारी कर रहा है। इसका असर व्यवसाय पर पड़ रहा है। कस्टम निरीक्षक आरके शुक्ला ने बताया कि बिना आईजीएसटी के नेपाल सामान नहीं ले जाने दिया जाएगा।
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दो किमी के दायरे में मादक पदार्थ की बिक्री और सेवन पर रोक
बैतड़ी/झूलाघाट(पिथौरागढ़) पश्चिमी नेपाल के बैतड़ी जिले का प्रसिद्ध त्रिपुरासुंदरी मेला शुक्रवार से शुरू होगा। मुख्य मेला (जात) शनिवार को होगी। मेले में सैकड़ों पशुओं की बलि दी जाएगी। मेले में किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए बैतड़ी जिला प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। मेला क्षेत्र के 2 किमी के दायरे में शराब की बिक्री और मद्यपान पर रोक लगा दी गई है।
इस वर्ष त्रिपुरा मंदिर व्यवस्थापन समिति ने 26 अक्तूबर से 29 अक्तूबर तक मंदिर के आसपास सुंदरखाली से फूलपाते, कुमाली से कापड़ीगांव और गोरचौड़ा से भाटीपोड़ा तक किसी भी तरह के नशे के सामान को बेचना और प्रयोग करना वर्जित किया है। इसका उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई करने के लिए बैतड़ी पुलिस प्रशासन से कहा गया हैं। साथ ही मेले में शांति व्यवस्था के लिए पहली बार नेपाल पुलिस के सशस्त्र बल को भी लगाया गया है। बैतड़ी के एसपी हेरंब शर्मा कटेल ने बताया कि मेले को शांतिपूर्ण संपन्न कराने के लिए नेपाल पुलिस के 100 से भी अधिक जवानों को लगाया गया है।
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भारत से नहीं गए बलि के लिए पशु
झूलाघाट (पिथौरागढ़)। त्रिपुरासुंदरी मेले में इस बार बलि के लिए भारतीय क्षेत्र से एक भी पशु नहीं ले जाया गया। भारतीय गांवों से लोग पिछले वर्षों तक मंदिर में चढ़ाने के लिए बकरी तथा भैंसों को ले जाते थे। पशुबलि रोकने के लिए अदालत के आदेश के बाद अब इसका असर सामने आने लगा है। एसएसबी के सहायक उपनिरीक्षक रमेश भट्ट ने बताया कि भारत के लोगों में धीरे-धीरे बलि प्रथा रोक के प्रति चेतना बढ़ने लगी है। इसका प्रमाण यही है कि अब तक एक भी पशु बलि के लिए नहीं ले जाया गया।
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