कश्मीर में आतंकी हमले में शहीद पाली (पांखू) के नायक चंद्र सिंह कार्की का सैन्य सम्मान के साथ थल के श्मशान घाट में सोमवार को अंतिम संस्कार किया गया। तिरंगे में लिपटा देश के सपूत का पार्थिव शरीर घर पहुंचा तो माहौल गमगीन हो गया। शहीद की वीरांगना चंद्रकला देवी, मां कौशल्या देवी, शहीद की दोनों बेटियों नेहा, निशा और शहीद के भाइयों का करुण क्रंदन देख वहां मौजूद हर किसी की आंखें भर आईं। शहीद की अंतिम यात्रा में हजारों लोगों ने शिरकत की।
सोमवार सुबह करीब 8 बजे शहीद का पार्थिव शरीर पाली पहुंचा। गांव में आसपास के क्षेत्रों के सैकड़ों लोग एकत्रित थे। शहीद का पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए उसी आंगन में रखा गया, जहां चंद्र सिंह का बचपन बीता। शहीद की मां कौशल्या देवी और दोनों बच्चे शव से लिपटकर दहाड़ मारकर रोने लगे।
शहीद की पत्नी चंद्रकला देवी बेहोश हो गई। शहीद के दोनों भाई भगत सिंह और साधो सिंह भी जोर-जोर से रोने लगे। गांव की महिलाएं, बच्चे, जवान, बूढ़े सबकी आंखों में आंसू थे। किसी तरह लोगों ने शहीद के परिजनों को संभाला।
सुबह करीब साढ़े नौ बजे शहीद का पार्थिव शरीर थल श्मशान घाट पहुंचा। श्मशान घाट से 600 मीटर पहले से शव पैदल श्मशान घाट तक लाया गया। इस दौरान लोगों ने ‘जब तक सूरज चांद रहेगा, तब तक चंद्र सिंह का नाम रहेगा’ के साथ ही पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाए।
लोगों में पाकिस्तान के खिलाफ बेहद गुस्सा था, हर किसी की जुबां पर पाकिस्तान को कड़ा सबक सिखाने की बात थी। श्मशान घाट में कुमाऊं स्काउट्स के कमान अधिकारी कर्नल ललित मोहन मिश्रा, कैप्टन आदित्य तरार, सूबेदार दरपान सिंह ने पुष्पतचक्र चढ़ाए और सलामी दी। कुमाऊं स्काउट्स के बैंड ने मातमी धुन बजाई। शहीद को 21 तोपों की सलामी दी गई। पार्थिव शरीर को शहीद के बड़े भाई भगत सिंह कार्की, छोटे भाई साधो सिंह ने मुखाग्नि दी।
गोली लगने के बाद भी एक आतंकी को ढेर किया
शहीद के पार्थिव शरीर के साथ आए भारतीय सेना के सूबेदार त्रिलोक सिंह जोरा, सिपाही महेंद्र सिंह ने बताया कि 25 नवंबर की सुबह साढ़े छह बजे सेना की टुकड़ी कश्मीर के बांदीपुरा जिले के नथखई गांव में गश्त कर रही थी। सैन्य टुकड़ी पर अचानक आतंकियों ने हमला कर दिया। सेना की 16 सदस्यीय टुकड़ी ने पोजीशन ले ली। नायक चंद्र सिंह कार्की ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए एक आतंकी को मौत के घाट उतार दिया। आतंकियों ने चंद्र सिंह पर फायर खोल दिया। गोली लगने के बाद भी चंद्र सिंह ने हौसला नहीं छोड़ा। गोली लगने के बाद भी एक और आतंकी को मौत के घाट उतार दिया और खुद देश पर कुर्बान हो गए। सूबेदार त्रिलोक सिंह जोरा ने बताया कि चंद्र सिंह बहुत साहसी थे, अन्य सैनिकों का भी हौसला बढ़ाते थे।
सुबह से ही इंतजार कर रही थी बेटियां
वीर सैनिक चंद्र सिंह कार्की की पुत्री नेहा (9) और निशा (6) सोमवार सुबह से ही पिता के पार्थिव शरीर का इंतजार कर रही थीं। दोनों बेटियों की नजरें घर को आने वाले रास्ते पर टिकी थी। पार्थिव शरीर ज्योंही घर में पहुंचा दोनों बेटियों की आंखें भर आईं।
बंद रहे बाजार, स्कूल
शहीद के शोक में पांखू का बाजार पूरी तरह बंद रहा। जीआईसी पांखू भी बंद रहा, स्कूल में शहीद को श्रद्धांजलि दी गई। थल बाजार पार्थिव शरीर आने के समय सुबह 9.30 बजे से 11.30 तक बंद रहा। जीआईसी, जीजीआईसी, मल्लिकार्जुन विद्यापीठ, सरस्वती हाईस्कूल विद्या मंदिर बंद रहे।
विद्यार्थियों ने शव यात्रा में शिरकत की। शव यात्रा में विधायक विशन सिंह चुफाल, नारायण राम आर्या, यूकेडी के शीर्ष नेता काशी सिंह ऐरी, एसडीएम वैभव गुप्ता, खंड विकास अधिकारी एसएस दरियाल, थल के थानाध्यक्ष दीपक बिष्ट, बेड़ीनाग के थानाध्यक्ष बलवंत कांबोज, उक्रांद के केंद्रीय संगठन मंत्री सलीम अहमद, व्यापार मंडल अध्यक्ष बलवंत सत्याल, महामंत्री सुनील सत्याल, व्यापार मंडल मंत्री गुड्डू पाठक, उपाध्यक्ष अनिल कार्की, सांसद प्रतिनिधि सतीश चंद्र जोशी, जिला पंचायत सदस्य सुंदर सिंह महरा, कैप्टन धन सिंह रावत, भाजयुमो के जिलाध्यक्ष दीपक सिंह कार्की, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य दिनेश आर्या आदि लोग शामिल थे। शवयात्रा में बेड़ीनाग, डीडीहाट, नाचनी, मुवानी, थल समेत तमाम इलाकों के लोग शामिल हुए।