लोगों के साथ भूवैज्ञानिक प्रो. वल्दिया
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प्रख्यात भू-वैज्ञानिक पद्मभूषण प्रोफेसर केएस वल्दिया ने कहा कि अपर हिमालया और मध्य हिमालया को जोड़ने वाला भ्रंश (फाल्ट) बिर्थी के पास से गुजरता है, जो कालामुनी से होते हुए नेपाल और शामा से उत्तरकाशी तक जाता है। यही मेन फाल्ट है। पृथ्वी के भीतर की हलचल ही भूकंप और भूस्खलन का प्रमुख कारण है।
अन्य वैज्ञानिकों के साथ मुनस्यारी जाते समय बिर्थी में रुके प्रोफेसर वल्दिया ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र में और भी छोटे-छोटे फाल्ट हैं, जिनसे इन्हीं क्षेत्रों में छोटे-छोटे भूकंप आते हैं। इनकी तीव्रता इतनी कम होती है कि जिनका मापन नहीं हो पाता। प्रोफेसर वल्दिया ने कहा कि जंगलों की आग के धुएं से धूलकणों के बादलों में मिश्रित होने से बादलों का घनत्व बढ़ जाता है। इससे बादल एक ही जगह पर बरसते हैं। इस पर लोगों का ध्यान जाना चाहिए। जंगल की आग को गंभीरता से लेना चाहिए।
कहा कि उन्होंने अपने अध्ययनकाल में हिमालयी क्षेत्र की 22000 किमी यात्रा की हैं। कई परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। दल में पद्मश्री प्रोफेसर शेखर पाठक, प्रोफेसर बीडी लखचौरा, प्रोफेसर केएस कठायत, प्रोफेसर एसएस वल्दिया, हिमालयन विकास समिति के अध्यक्ष राजेंद्र बिष्ट, जगत दशौनी, जिला पंचायत के पूर्व सदस्य महेंद्र सिंह, श्याम सिंह दानू आदि शामिल थे।