थल के गोल गांव में वर्षों से बंद पड़ी सिंचाई नहर
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गोल, सिमार, जौरासी, टिमटौड़ा गांव के लोगों ने 1952 में श्रमदान से जिस सिंचाई नहर का निर्माण किया था, उसे 1996 में विभाग ने अपने अधीन तो ले लिया, लेकिन इस नहर की दुर्गति भी उसी दिन से शुरू हो गई। सिंचाई विभाग के अधीन नहर के जाते समय लोगों को लगा कि अब इसकी देखरेख सही ढंग से होने लगेगी और खेतों तक पानी पहुंचेगा, लेकिन नहर कुछ समय बाद से ही टूटने लगी और पानी खेतों तक नहीं पहुंचने लगा। नतीजतन चारों गांवों की 50 हेक्टेयर जमीन पर खेती होना बंद हो गई।
गांव के लोग बताते हैं कि जलाती नाले से पांच किलोमीटर लंबी इस नहर का निर्माण गांव के लोगों ने श्रमदान से किया था। जब तक नहर की देखरेख लोग खुद करते थे, इसमें पानी की कोई कमी नहीं थी। इस नहर की मरम्मत करने के बजाय विभाग ने 2009 में इस गांव के लिए लिफ्ट सिंचाई योजना का निर्माण कर दिया। लिफ्ट सिंचाई योजना बनाने से पहले सिंचाई विभाग ने यह लिखकर दे दिया कि पहले से बनी नहर अब बंद हो चुकी है। गांव के लोगों की मुसीबत लिफ्ट योजना बनने से भी दूर नहीं हुई।
लिफ्ट योजना में लगाए गए घटिया उपकरणों ने सिर्फ छह महीने तक ही काम किया। अब खेतों में न तो नहर का पानी पहुंचता है और न लिफ्ट योजना से ही लोगों को लाभ मिल रहा है। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता पीसी नैनवाल का कहना है कि सिंचाई नहर को फिर से विभाग को हस्तांतरित करना पड़ेगा। उसके बाद ही मरम्मत का काम शुरू हो पाएगा।
लापरवाह विभाग की जांच होनी चाहिए
गोल निवासी कलावती टम्टा का कहना है कि सरकारी विभागों की लापरवाही के कारण खेत बंजर हो गए हैं। वह बताती हैं कि जब तक नहर की देखरेख गांव के लोग करते थे, तब तक पानी की कभी दिक्कत नहीं हुई। वह कहती हैं कि लापरवाह विभागों की जांच होनी चाहिए और किसानों को हो रहे नुकसान की भरपाई भी की जानी चाहिए।
नेताओं को तो ध्यान देना चाहिए
गोल निवासी लता टम्टा का कहना है कि अधिकारियों और नेताओं को इस तरह की अंधेरगर्दी नजर नहीं आती। वह कहती हैं कि लोगों को गांव छोड़ने के लिए सरकारी तंत्र ही मजबूर करते हैं। यदि बिजली, पानी, सिंचाई की सही सुविधा मिले तो गांव का कोई भी व्यक्ति अन्यत्र जाने की नहीं सोचता। नेताओं को कम से कम इस पर ध्यान देना चाहिए।