स्रोतों के संरक्षण का अभियान चलाते शंखनाद चेतना मंच के सदस्य
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शंखनाद चेतना मंच ने रविवार को रई धारे के संरक्षण के लिए अभियान चलाया। अब रई धारा भी प्रदूषण की चपेट में आ गया है। पहले इस धारे से रई मोहल्ले के लोगों की प्यास बुझती थी, लेकिन अब लोग इसके पानी को पीने में उपयोग नहीं करते। यह सिर्फ नहाने, कपड़े धोने के काम आ रहा है। नौले और धारों को पहाड़ की जीवनरेखा बताया गया।
शंखनाद चेतना मंच के निदेशक ललित शौर्य ने कहा कि रई धारे में पानी तो बहुत है लेकिन यह प्रदूषित हो गया है। इसकी मुख्य वजह यह है कि लोगों ने पानी का उपयोग तो किया लेकिन सफाई पर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि स्रोत के पास कपड़ों की धुलाई न की जाए, गंदगी और पॉलिथीन न फेंकी जाए, पानी की स्वच्छता बनाए रखने के लिए प्रयास किए जाएं, समय-समय पर स्रोत के आसपास सफाई अभियान चलाया जाए। समाजसेवी सोनम पांडे ने कहा कि पेयजल स्रोतों के संरक्षण के लिए चलाई गई इस मुहिम के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। अभियान के दौरान भास्कर मखौलिया, हेमंत बिष्ट, होशियार सिंह, मनीष बोहरा, कमल खोलिया, बसंत खोलिया, दिनेश कठायत आदि लोग थे। अगले सप्ताह किसी दूसरे स्रोत के संरक्षण का अभियान चलाया जाएगा।