टनकपुर-पिथौरागढ़ नेशनल हाइवे के हाल पहले से खराब थे। अब मार्ग एनएच को हस्तांतरित होने के प्रक्रिया के चलते बदहाली और बढ़ गई है। एक अप्रैल से बीआरओ से काम एनएच को हस्तांतरित हो जाएगा। ऐसे में बीआरओ का काम को लेकर ज्यादा फोकस नहीं है, तो दूसरी तरफ एनएच भी निश्चित तारीख तक सड़क पर हाथ लगाने की स्थिति में नहीं है। इसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है।
नवंबर माह में एनएच के पास सड़क हस्तांतरित होने का आदेश हुआ है। इसके बाद से बीआरओ ने सड़क का रखरखाव छोड़ दिया है। बीआरओ ने पूर्व में नेशनल हाइवे में हाटमिक्स का काम शुरू किया था, शहर में ही यह काम अधूरा पड़ा है। एनएच के पास सड़क जाने से बीआरओ ने सड़क में हाटमिक्स का काम अधूरा छोड़ दिया। सड़क में जगह-जगह गड्ढे पड़ गए हैं। लोगों में सड़क की बदहाली को लेकर रोष है। अभी सड़क 65 आरसीसी बीआरओ टनकपुर के अधीन बताई जा रही है। जिला उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष पवन कुमार जोशी, पिथौरागढ़ जनमंच के संयोजक भगवान रावत, भाकपा माले के जिला प्रवक्ता गोविंद कफलिया ने नेशनल हाइवे की बदहाली पर रोष प्रकट करते हुए कहा कि प्रशासन और सरकार में बैठे जिम्मेदार अधिकारियों और नेताओं को हस्तक्षेप करना चाहिए। एनएच के लोहाघाट डिवीजन के अधिशासी अभियंता एसएम धर्मशक्तू का कहना है कि टनकपुर से पिथौरागढ़ तक की सड़क 1 अप्रैल को एनएच के अधीन आनी है। तब तक सड़क की देखभाल बीआरओ को करनी है।