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झूलाघाट में फंदे पर लटका मिला कर्ज में डूबा व्यापारी

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नरेंद्र सिंह गोबाड़ी (फाइल फोटो) - फोटो : PITHORAGARH
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झूलाघाट (पिथौरागढ़)। भटेड़ी निवासी एक व्यापारी का शव उसके रेस्टोरेंट के कमरे में रस्सी से लटका मिला। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। परिजनों के अनुसार व्यापारी पर बैंकों का करीब 12 लाख रुपये का कर्ज था। उनका कहना है कि लॉकडाउन के कारण 10 माह से दुकान बंद होने से व्यापारी परेशान था। पुलिस ने बताया कि मौके से सुसाइड नोट नहीं मिला है लेकिन प्रथमदृष्टया मामला आत्महत्या का लग रहा है।
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कस्बे से सटे भटेड़ी निवासी नरेंद्र सिंह गोबाड़ी (48) का पोल्ट्री फार्म और झूलाघाट में रेस्टोरेंट है। पिछले वर्ष 22 मार्च से लगे लॉकडाउन के बाद नेपाल से लगने वाले सभी झूलापुल बंद कर दिए गए। 95 फीसदी व्यापार पूरी तरह नेपाल पर निर्भर होने के कारण व्यवसाय चौपट हो गया था। झूलाघाट के कोमल चौक पर व्यापार करने वाले नरेंद्र सिंह पुल खुलने के बाद भी व्यापार में बढ़ोतरी न होने से परेशान थे। पड़ोसियों के अनुसार नरेंद्र बार-बार चुकाने के नोटिस आने से काफी परेशान था।
इधर, बुधवार सुबह रेस्टोरेंट के कमरे में नरेंद्र का शव फंदे पर लटका मिला। चश्मदीदों के अनुसार कमरे में चारपाई के ऊपर बेंच रखी थी, जिससे अंदेशा लगाया जा रहा है कि नरेंद्र ने बेंच पर चढ़कर चादर से बनी रस्सी से फंदा लगाया होगा।
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सहायक निरीक्षक संजय कुमार ने बताया 11 बजे रेस्टोरेंट न खोलने पर पड़ोसियों ने खिड़की से झांका तो नरेंद्र शव फंदे से लटका था।। मौके पर पहुंची पुलिस ने परिजनों की मौजूदगी में रेस्टोरेंट का दरवाजा तोड़कर शव को बाहर निकाला। बाद में शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। सीओ राजन सिंह रौतेला ने बताया कि मौके पर पुलिस को कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। हालांकि प्रथम दृष्टया में मामला आत्महत्या का लग रहा है।
मां और बच्चों का रो-रो कर बुरा हाल
झूलाघाट। नरेंद्र ने 10 लाख कोऑपरेटिव और दो लाख रुपये का लोन ग्रामीण बैंक से लिया था। उसके परिवार में पत्नी, दो बेटे, एक बेटी, बूढ़ी मां और तीन भाई हैं। एक भाई गांव में खेतीबाड़ी और दो भाई हरियाणा के स्कूलों में चौकीदारी करते हैं। नरेंद्र के पिता सेना में थे। मां को पेंशन मिलती है। घटना के बाद पत्नी और बच्चों सहित बूढ़ी मां का रो-रोकर बुरा हाल है।
झूलाघाट कस्बे के 150 व्यापारियों ने लिया है बैंकों से लोन
झूलाघाट (पिथौरागढ़)। कोरोना टीकाकरण शुरू होने के बावजूद सीमांत के झूलाघाट कस्बे के व्यापारी संकट से नहीं उबर सके हैं। कस्बे के 150 से अधिक व्यापारियों ने बैंकों से लोन लिया है। 10 माह से दुकानें बंद होने के कारण इन पर बैंकों के ब्याज की राशि बढ़ गई है। इसी तनाव के कारण एक व्यापारी की जान तक चली गई।
नेपाल सीमा पर स्थित झूलाघाट में 185 व्यापारी पूरी तरह नेपाल पर निर्भर हैं। रोज खुला रहने वाला यह कस्बा पहली बार 10 माह तक बंद रहा। किराए की दुकान, घर और कर्ज लेकर व्यापार करने वाले कई लोग इससे सबसे अधिक प्रभावित हुए। 12 से अधिक लोग व्यापार के लिए पिथौरागढ़, लोहाघाट, चंपावत की ओर निकल गए। व्यापारियों ने आर्थिक पैकेज के लिए 15 दिन तक आंदोलन भी किया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। केंद्र सरकार ने पिछले साल आर्थिक पैकेज की घोषणा भी की लेकिन व्यापारियों को पर्याप्त राहत नहीं मिल सकी। हालांकि सरकार ने लॉकडाउन अवधि में किसी बकाएदार को नोटिस और आरसी जारी नहीं की, लेकिन लोन लिए गए ब्याज के लिए किसी को छोड़ा भी नहीं। बैंकों ने मार्च 20 से नवंबर 20 तक के ब्याज की रकम का लोन देकर व्यापारियों के खाते में जमा कराया। इससे व्यापारी पर लोन का भार बढ़ गया है। इस कारण कई लोग कर्ज नहीं चुका पा रहे हैं। व्यापार संघ कोषाध्यक्ष दीपक इजरवाल ने बताया 10 माह बाद सीमा पुल खुला है। उसके बाद भी नेपाल के कई ग्राहक भारतीय बाजार में नहीं आ पा रहे हैं। इस कारण झूला पुल खुलने के बाद भी बाजार के 90 प्रतिशत व्यापारी मायूस नजर आ रहे हैं।
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