पिथौरागढ़। जिले में कोरोना की लहर ने लोगों को व्यापार बदलने पर मजबूर कर दिया है। अप्रैल से जारी कोविड कर्फ्यू के कारण व्यापारी बेहद परेशान हैं।
शासन स्तर से उन्हें कोई राहत नहीं मिली है। बिजली, पानी के बिल, घर का खर्च, दुकान का किराया, बच्चों की फीस आदि खर्चे पूरा करने के लिए वे कारोबार बदलने को मजबूर हैं।
जीआईसी में दूध डेयरी चलाने वाले निस्सू उप्रेती अब सब्जी बेचने लगे हैं। उन्होंने पांच साल पूर्व दूध डेयरी खोली थी। धंधा अच्छा चलता था। रोज 700 लीटर से अधिक दूध आता था लेकिन अब हालात खराब हो गए हैं।
कारोबार अवधि घटने के कारण 50 से 100 लीटर दूध ही मंगा रहे हैं। इससे ज्यादा दूध मंगाने से नुकसान बढ़ जाएगा। पुराना बाजार में हॉलमार्क का काम करने वाले विनोद ने दुकान, मकान, बच्चों की फीस और घर खर्च के लिए सब्जी की दुकान खोल ली है।
वहीं पिथौरागढ़ में करीब दो हजार टैक्सी वाहनों का संचालन होता है। इनमें से करीब 125 वाहन अकेले धारचूला जाते थे, जबकि 225 वाहन हल्द्वानी तक यात्रियों को पहुंचाते थे।
कोरोना की दूसरी लहर में कम वाहन चल रहे हैं। इस कारण बैंक ऋण लेकर वाहन खरीदने वाले लोग किस्त नहीं दे सके हैं जबकि बैंकों से ऋण चुकाने के लिए कई बार पत्र भेजे जा रहे हैं।
शासन को टैक्सी संचालकों के बारे में भी सोचना चाहिए। टैक्सी संचालन कर कई लोग अपना जीवन गुजर बसर करते हैं। या तो सरकार वाहनों के सभी टैक्सी माफ कर दे या आर्थिक मुआवजा दे दे।
-नवल किशोर, टैक्सी यूनियन अध्यक्ष
हल्द्वानी के लिए दो वाहनों का संचालन करती हूं लेकिन पिछले दो माह से घर चलाना मुश्किल हो गया है। चालक को भी अपनी जेब से पैसा देना पड़ रहा है। सरकार को जल्द ठोस कदम उठाने चाहिए।
- मीना, टैक्सी संचालिका
जिले में कोरोना के अधिक मामलों के कारण अनलॉक की उम्मीद बेहद कम दिख रही है। वाहन चालकों पर ही इसकी सबसे अधिक मार पड़ी है। राहत नहीं मिली तो वाहन चलाने का काम छोड़ना पड़ेगा।
- राज, पिथौरागढ़।
कोविड कर्फ्यू ने हालत खराब कर दी है। बच्चों की स्कूल फीस, मकान का किराया समेत अन्य खर्च अब भारी होने लगे हैं। बच्चों को उनकी पसंद का भोजन तक नहीं करा पा रहे हैं।
- बंटी खान