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बौराणी का म्याल लागी रो, सैम ज्यू का धार मा...

Sat, 24 Nov 2018 10:35 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बेड़ीनाग
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ऐतिहासिक बौराणी मेले में 30 फुट लंबी मशाल के साथ लोग - फोटो : अमर उजाला
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बौराणी मेला एवं लोक सांस्कृतिक महोत्सव के मुख्य मंच पर रात भर सांस्कृतिक दलों का धमाल रहा। सुबह साढ़े पांच बजे अगले साल फिर मिलने के वादे के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। इससे पहले सांस्कृतिक संध्या का उद्घाटन जिला पंचायत उपाध्यक्ष बीरेंद्र महरा ने किया।

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उभरते स्थानीय लोक गायक कल्याण बोरा ने स्वरचित गीत ‘बौराणी का म्याल लागी रो, सैम ज्यू का धार मा’ सुनाया तो दर्शक झूमने लगे। कल्याण बोरा ने लोक गायक स्वर्गीय पप्पू कार्की और स्वर्गीय कबूतरी देवी की स्मृति में उनके गीतों को गाया। ‘तेरी रंग्याली पिछौड़ी कमू, पहाड़ो तो ठंडो पाणी, सुण कति मिठि वाणी’ गीतों को दर्शकों ने सराहा।

पप्पू महर एंड पार्टी, खटीमा और विहान सामाजिक एवं सांस्कृतिक परिषद अल्मोड़ा के कलाकारों ने एक से बढ़कर एक कार्यक्रमों का प्रदर्शन किया। बेबी प्रियंका के ‘हाय ककड़ी झीले मा, लूंण पीसो सीले मा’ गीत पर दर्शकों ने जमकर ठुमके लगाए। पप्पू महर एंड पार्टी की प्रस्तुति बृज की होली खासी सराही गई। कड़ाके की ठंड के बावजूद दर्शकों ने कार्यक्रमों का पूरा आनंद उठाया। बौराणी मेला एवं लोक संस्कृति महोत्सव समिति के अध्यक्ष राजेंद्र बोरा ने सभी का आभार जताया। संचालन नानू बिष्ट ने किया।
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इस बार भी मशाल सब पर भारी
बेड़ीनाग। इस बार भी बौराणी की ऐतिहासिक मशाल मेले का मुख्य आकर्षण थी। शुक्रवार रात बारह बजे गोबरगाड़ा ग्राम पंचायत से लाई गई छिलके (चीड़ के पेड़ के ज्वलनशील भाग की लकड़ी) की 27 फुट लंबी मशाल के साथ सैम मंदिर में परिक्रमा की गई। लोगों का हुजूम जयकारे के साथ मशाल के स्वागत के लिए उमड़ पड़ा। स्थानीय भाषा में इस मशाल को रांखा कहते हैं। मेले में पहुंचे 81 वर्षीय बुजुर्ग धनसिंह बोरा ने बताया कि मेले में मशाल लाने की परंपरा सदियों पुरानी है। वह बचपन से इस परंपरा के साक्षी हैं। उन्होंने बताया कि मशाल स्थानीय लोगों के लिए सुख, समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक है। प्रत्येक मेलार्थी इसके दर्शन अवश्य करता है। इस बार भी मशाल को मंदिर की सात परिक्रमा के बाद मंदिर प्रांगण में गाड़ दिया गया। मशाल की परिक्रमा के दौरान मुख्य मंच के कार्यक्रम रोक दिए गए थे।

मंदिर परिसर में नौर्त का आयोजन
बेड़ीनाग। सैम मंदिर परिसर में झोड़ा, चांचरी और नौर्त का ऐतिहासिक आयोजन इस बार भी परंपरागत तरीके से किया गया। ऐतिहासिक मशाल के मंदिर परिसर में गाड़ने के बाद यहां नौर्त शुरू हुआ। देव डांगरों ने सैम देवता का आवाहन किया तो लोगों का हुजूम मंदिर परिसर में उमड़ पड़ा। अखंड धूनी में देव डांगर मोहन सिंह, गुलाब राम, फकीर राम, जीत राम आदि ने नौर्त के माध्यम से श्रद्धालुओं की जिज्ञासाओं को शांत किया।

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