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भारी पड़ी पहाड़ के माहौल की अनभिज्ञता

Thu, 17 Dec 2015 10:27 PM IST
सुधीर राठौर/अमर उजाला, सुधीर राठौर
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मैदानी इलाकों की स्टाइल पर पहाड़ में गुर्गों के माध्यम से दहशत फैला कर जबरन खड़िया खनन कराने का प्रयास हरियाणा के उद्योगपति पर भारी पड़ गया है। खनन के फेर में फंसे इस व्यक्ति पर अभी विभिन्न धाराओं में जेल में बंद अपने गुर्गों की जमानत कराने के साथ कानूनी लड़ाई की चुनौती भी है।
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बेड़ीनाग से आठ किलोमीटर दूर राईगड़स्यारी गांव में 13 दिसंबर को पुलिस ने बलवा और अशांति फैलाने के आरोप में 68 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, जबकि इस दल के अगुवा हरियाणा के उद्योगपति मनीष यादव को निजी मुचलके पर जमानत में छोड़ दिया था। सूत्रों के अनुसार कम क्षेत्रफल और विपरीत परिस्थितियों के कारण इस पट्टे पर खनन कार्य स्वीकृति के चार साल बाद शुरू हुआ। इसके बाद इसका संचालन कई हाथों में गया।

गत वर्ष कुछ लोग हरियाणा के उद्योगपति मनीष यादव को सब्जबाग दिखा कर यहां इस कार्य के संचालन के लिए लाए। ग्रामीणों द्वारा खनन क्षेत्र तक मशीन न पहुंचने देने के कारण वापस होने के बाद यह लोग इस बार दबंगई की पुरबिया ठसक के साथ गुर्गों को लेकर यहां पहुंचे, लेकिन पहाड़ के माहौल की अनभिज्ञता इन पर भारी पड़ गई है।
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2014 से बंद है यह खदान
खनन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार बेड़ीनाग तहसील के राईगड़स्यारी गांव में ललित मोहन पेटशाली ग्राम एवं पोस्ट चितई के नाम 1.41 हेक्टेयर क्षेत्रफल में खड़िया खनन के पट्टे का शासनादेश 13 दिसंबर 2004 को जारी हुआ था, जिसे 29 दिसंबर 2004 को पंजीकृत कराया गया था। इस पट्टे में अप्रैल 2008 से खनन कार्य शुरू हुआ था और जून 2014 के बाद इसमें काम शुरू नहीं हुआ है, जबकि पट्टे की अवधि पंजीकरण की तिथि से 20 साल तक है।

खनन के लिए मशीन की इजाजत नहीं
खनन कार्य में भारी मशीनों के इस्तेमाल के लिए खान सुरक्षा महानिदेशालय, भारत सरकार की स्वीकृति आवश्यक है, लेकिन राईगड़स्यारी के इस पट्टे के लिए इस कार्यालय से स्वीकृति जारी नहीं हुई है। ग्रामीणों के अनुसार पूर्व में भी यहां पोकलैंड और जेसीबी से खनन किया गया। हरियाणा के उद्योगपति मनीष यादव ने एक साल से मौके पर पड़ी पोकलैंड को गुर्गों से दहशत फैलाकर खनन क्षेत्र में ले जाने का प्रयास किया। पिथौरागढ़ के खनन कार्यालय से भी मशीन की स्वीकृति न होने की पुष्टि हुई है।

पट्टाधारक सरकारी रायल्टी का भी है बकाएदार
इस मामले में पट्टाधारक द्वारा ग्रामीणों को तय रायल्टी का भुगतान न करने की बात प्रकाश में आई थी, लेकिन अब खनन विभाग ने भी पट्टाधारक पर सरकारी रायल्टी का बकाएदार होने की बात बताई है। बताया कि जून 2014 से पट्टाधारक पर 3.50 लाख रुपये का बकाया है।

पट्टा हस्तांतरण की नहीं हुई है कार्रवाई
खनन पट्टाधारक ललित मोहन पेटशाली ने पूर्व में लाखन सिंह नाम के व्यक्ति को यह पट्टा हस्तांतरित होने पर कोई आपत्ति न होने का पत्र खनन कार्यालय में जमा कराया है, लेकिन पट्टा हस्तांतरण के लिए ग्रामीणों का अनापत्ति पत्र भी राजस्व विभाग से प्रमाणित कर 5 लाख रुपये के बैंक चालान एवं अन्य अभिलेखों के साथ जिलाधिकारी कार्यालय में जमा करना होता है। इसके बाद डीएम की संस्तुति के बाद शासन हस्तांतरण की कार्रवाई करता है। खान अधिकारी दिनेश कुमार ने बताया कि पट्टा हस्तांतरण तक सारी गतिविधियों के लिए वर्तमान पट्टाधारक ही जिम्मेदार होता है।
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