आम बजट को जहां भाजपाइयों ने आम आदमी को राहत देने वाला बताया है वहीं कांग्रेस समेत विपक्षियों ने इसे गरीब, मजदूर, किसान विरोधी बताया है। विपक्षियों ने रेल सुविधा समेत उत्तराखंड को कुछ भी नहीं दिया गया है। लोगों का कहना है कि उत्तराखंड को ग्रीन बोनस देना चाहिए था। यह भी नहीं मिला। ग्रहणियों का कहना है कि महिलाओं के हित में कुछ नही किया गया है। महिलाओं के किचन का भी ध्यान नहीं रखा गया है। आम लोगों ने बजट को लेकर मिली जुली प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
बोले लोग-
- यह आम बजट अमृत काल का महत्वपूर्ण बजट है। इसमें हर वर्ग का ख्याल रखा गया है। यह बजट पूरी तरह से समृद्धि और निष्पक्षता की ओर इशारा कर रहा है। यह बजट आत्मनिर्भर भारत की दिशा में उल्लेखनीय कदम साबित होगा। - गिरीश जोशी, जिलाध्यक्ष भाजपा।
- सरकार का बजट कागजों में तो ठीक दिखता है, लेकिन इस बजट से किसानों को जमीनी स्तर पर कोई फायदा नहीं मिलता है। सरकार को किसानों को मुफ्त बिजली, सस्ती खाद, उपकरण और बागवानी करने वाले लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए छोटी-छोटी योजनाएं बनाई चाहिए। - कुंदन सिंह, किसान।
- मोदी सरकार ने जो बजट पेश किया है वह सिर्फ कुछ धन्ना सेठों और अमीर लोगों को राहत के लिए है। गरीब वर्ग के लिए इस बजट में कोई राहत नहीं है जिससे साफ जाहिर होता है कि भाजपा और मोदी सरकार सिर्फ अमीरों की सरकार है। यह बजट गरीब, मजदूर, महिला, किसान, युवा विरोधी है। - महेंद्र सिंह लुंठी, कांग्रेस नेता।
- कर्मचारी और शिक्षकों के लिए जारी बजट हित में नहीं है। देश भर में बजट आने से पहले जो उम्मीद थी वह समाप्त हो गई है। एनपीएस में पूर्व में कर्मचारी शिक्षक के वेतन से अंशदान के नाम पर जो 10 फीसदी राशि काटी जाती थी, अब उसे बढ़ाकर 14 प्रतिशत करना निराशाजनक है। - बिजेंद्र लुंठी, जिलाध्यक्ष एनएमओपीएस पिथौरागढ़।
- बजट में किचन का ध्यान नहीं रखा गया है। महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बजट में कुछ नहीं है। सरकार को इस बजट में महंगाई को कम करने के लिए कदम उठाने चाहिए थे। यह बजट सिर्फ अमीर लोगों के लिए है। - हेमा थलाल, गृहिणी।
- इनकम टैक्स में विशेष कर छूट की राशि एक लाख होने की उम्मीद थी, लेकिन सरकार ने उसका दायरा भी 75 प्रतिशत ही रखा है। कुल मिलाकर शिक्षक कर्मचारी के लिए ये बजट निराशाजनक रहा है। - जगत सिंह खाती, माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रांतीय उपाध्यक्ष।
- केंद्र सरकार के बजट में उत्तराखंड राज्य के लिए कुछ नहीं है। केंद्र सरकार को उत्तराखंड को ग्रीन बोनस देना चाहिए था। टनकपुर- बागेश्वर रेल लाइन निर्माण के लिए भी केंद्र सरकार ने कोई प्रावधान नहीं किए है। - मनोज ओझा, कांग्रेस नेता।
- मोदी सरकार की ओर से प्रस्तुत केंद्रीय बजट कर्मचारियों की अपेक्षा के अनुरूप नहीं है। यह शिक्षक एवं कार्मिकों के साथ छलावा मात्र है। आयकर के स्लैब में किए गए मामूली बदलाव से कर्मचारी और शिक्षकों को कोई फायदा नहीं होगा। बजट में पुरानी पेंशन को लागू न करना भी शिक्षक और कार्मिकों के हकों का हनन है। - नगेंद्र जोशी, जिला अध्यक्ष उत्तरांचल पर्वतीय शिक्षक कर्मचारी संगठन
- केंद्रीय बजट में आपदा के लिए उत्तराखंड को विशेष सहायता पैकेज मिला है। यह बजट सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास के लक्ष्य को साकार करने वाला है। यह एक दूरदर्शी बजट है, जो 2047 तक विकसित भारत के सपने को साकार करने में अहम भूमिका निभाएगा। - सुभाष बगौली
- केंद्रीय बजट में बेरोजगारों के लिए कोई योजना नहीं रखी गई है। बजट मात्र दिखावा है। स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर कोई योजना नहीं रखी गई। किसानों को लेकर कोई भी योजनाएं नहीं दी गई हैं। - पूरन कठायत, जिलाध्यक्ष कांग्रेस, चंपावत
- उत्तराखंड में दैवी आपदा से होने वाले नुकसान के लिए स्पेशल सहायता पैकेज देने की घोषणा ने राहत देने का काम किया है। इस स्पेशल पैकेज के माध्यम से प्रदेश में आपदाओं से होने वाली क्षति राज्य की विकास की गति को बाधित नहीं कर सकेगी। - सूरज प्रहरी, भाजपा नेता, चंपावत
- बजट में गरीब, युवा, महिला, किसान जैसे प्रमुख वर्गों पर ध्यान देने का प्रयास किया गया है। कैंसर की तीन दवाइयों से कस्टम ड्यूटी कम कर स्वास्थ्य व्यय भार को कम करना सार्थक पहल है। युवाओं के लिए मुद्रा लोन की रकम 10 लाख से बढ़ाकर 20 लाख रुपये करने से व्यापार क्षेत्र का विकास होगा। - दिनेश कुमार गुप्ता, डिग्री कॉलेज अमोड़ी, चंपावत