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बस्तड़ी की आपदा प्रभावित महिलाओं ने दिया धरना

Sat, 10 Sep 2016 11:00 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, डीडीहाट
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बस्तड़ी में धरना देती आपदा पीड़ित महिलाएं - फोटो : अमर उजाला
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सरकार की तरफ से कुछ राहत मिलने की उम्मीद लगाकर बैठे बस्तड़ी के आपदा प्रभावितों के सब्र का बांध अब टूटने लगा है। शनिवार को बस्तड़ी की महिलाओं ने धरना देकर प्रशासन और सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी कि अब झूठ और कोरे आश्वासनों से लोग भ्रमित नहीं होंगे। 15 सितंबर तक यदि समस्या का समाधान नहीं होता तो लोग बेमियादी धरना शुरू कर देंगे। नेताओं पर आपदा पीड़ितों के साथ राजनीति करने का आरोप लगाया गया।
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बस्तड़ी की आपदा प्रभावित महिलाओं ने कहा कि सरकार ने पक्के मकान बनने तक किराए के मकानों में रहने को कहा था और किराए का भुगतान सरकार करेगी, ऐसा आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक किसी भी परिवार को किराए की राशि नहीं मिली है। ठुलखाली में नया बस्तड़ी बसाने का सुझाव खुद मुख्यमंत्री, सांसद, जिला और प्रदेश स्तर के अन्य नेताओं ने दिया था, लेकिन नए बस्तड़ी में नाममात्र के टेंट का ढांचा खड़ा कर दिया गया। वहां पर पानी, बिजली की कोई सुविधा नहीं है। महिलाओं का कहना है कि जिस स्थान पर टेंट लगाए गए हैं, वह जंगल के नजदीक हैं।

वहां पर जंगली जानवरों का खतरा हर समय बना रहता है। महिलाओं ने कहा कि एक जुलाई से सभी परिवार राहत कैंपों में हैं। एक कमरे में तीन-तीन परिवारों को रहना पड़ रहा है। महिलाओं की मांग है कि बस्तड़ी में पक्के मकानों का निर्माण किया जाए और सरकार अपने वादे को तत्काल पूरा करे। धरने पर आनंदी देवी, पार्वती देवी, तनुजा भट्ट, बसंती देवी, लीलावती, मंजू भट्ट, राधिका देवी, सुनीता भट्ट, भागीरथी देवी, पुष्पा देवी, ममता भट्ट, मोहनी देवी आदि बैठीं। गांव के शंकर दत्त भट्ट और गोविंद भट्ट का कहना है कि यदि सरकार को कुछ कर पाने की ताकत नहीं है तो लोगों को उसी हाल में छोड़ देना चाहिए था। घड़ियाली आंसू बहाने वाले अब कहां गए।
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