कनालीछीना (पिथौरागढ़)। विकास और संचार सेवाओं की बेहतरी के नाम पर सिस्टम लोगों को सब्जबाग दिखाता रहता है, जो साकार नहीं हो रहे हैं। कई बार यह इंतजार इतना लंबा हो जाता है कि आधे-अधूरे कार्य ही लोगों के लिए मुसीबत बनने लगते हैं। कुछ ऐसा ही हाल कनालीछीना विकासखंड के ग्राम पंचायतों में लगे बीएसएनएल के टावरों का है, जो 31 वर्ष पूर्व स्थापित किए गए। आबादी क्षेत्र में लगे करीब 40 फीट ऊंचे इन टावरों से अब तक गांवों में फोन की घंटी तो नहीं बजी। अब ये खतरे की घंटी बजा रहे हैं। सालों पुराने जर्जर हो चुके इन टावरों के गिरने का खतरा बना है। इससे बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
31 वर्ष पूर्व वर्ष 1996 में बीएसएनएल ने बेहतर संचार सुविधा के नाम पर विकासखंड के ख्वांतड़ी, कापड़ी गांव, बिसौनाखान, लोहाकोट समेत अनेक ग्राम पंचायतों में एक दर्जन से अधिक 40 फीट ऊंचे टावर गांव की आबादी के बीच स्थापित किए गए। ठेके पर लगाए गए ये टावर अब गांव वालों के लिए खतरा बन गए हैंं। इनकी नींव कमजोर होने के साथ ही लोहा सड़ने से इनके गिरने का खतरा बना है। ग्रामीणों का कहना है कि इन टावरों के निर्माण की गुणवत्ता पहले से ही खराब है और इतने लंबे समय बाद अब ये कभी भी आवासीय मकानों के ऊपर गिर सकते हैं। ऐसे में जान और माल दोनों का ही खतरा बना हुआ है। संवाद
टावरों को हटाने के लिए कागजों में हो गई नीलामी
बीएसएनएल के अधिकारियों ने टावरों को लेकर हैरान करने वाला खुलासा किया है। अधिकारियों का कहना है कि इन टावरों का उपयोग न होने पर इन्हें हटाने की योजना बनी। इसके लिए इनकी नीलामी की गई। ठेकेदारों को इन्हें हटाने की जिम्मेदारी सौंपी गई। ठेकेदार इन्हें हटाए बगैर ही गायब हो गए और बीएसएनएल ने इसकी जानकारी लेने की जहमत तक नहीं उठाई। बीएसएनएल ने टावरों की नीलामी के नाम पर लाखों रुपये ले लिए और इस पर निगरानी क्यों नहीं की, यह सवाल चर्चाओं में है।
बोले लोग
विभाग को इस बारे में कई बार सूचित किया जा चुका है लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। - दीपक सामंत, क्षेत्र पंचायत सदस्य, ख्वांतड़ी
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तीन दशक पहले खड़े किए गए टावरों से अब तक संचार सुविधा न मिलना बेहद अफसोस की बात है। - लक्की सामंत, बजेत
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क्षेत्र में लगे बीएसएनएल के टावर पहले से कमजोर स्थिति में हैं, जो कभी भी धराशायी - जितेंद्र, ख्वांतड़ी
कोट
दशकों पूर्व लगे टावरों की नीलामी हो गई है। इन्हें हटाने के लिए ठेकेदारों को जिम्मेदारी दी गई। यदि ठेकेदारों ने इन टावरों को नहीं हटाया है तो अब संबंधित ग्राम पंचायत इनकी नीलामी करने के लिए स्वतंत्र है। - एसएन रावत, डीजीएम, प्रचालन, बीएसएनएल, अल्मोड़ा