इनरलाइन शिफ्ट करने की मांग को लेकर धारचूला में तहसीलदार को ज्ञापन देते लोग
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तहसील मुख्यालय से 60 किलोमीटर दूर छियालेख में स्थित इनरलाइन को महत्वहीन बताते हुए सीमांत सुरक्षा समिति ने इसे पहले की तरह जौलजीबी शिफ्ट करने की मांग की है। उन्होंने इस बाबत शुक्रवार को तहसीलदार के माध्यम से प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा।
1998 में पर्यटन विकास का हवाला देकर इनरलाइन को जौलजीबी से छियालेख शिफ्ट कर दिया गया था। तब तक धारचूला आने के लिए बाहरी लोगों को एसडीएम से अनुमति पत्र लेना पड़ता था। यह अनुमति पत्र भी सिर्फ तीन दिन के प्रवास के लिए दिया जाता था। इनरलाइन हटने के बाद धारचूला में बाहरी लोगों की गतिविधियां अप्रत्याशित रूप से बढ़ गई हैं। धारचूला में आपराधिक घटनाएं भी लगातार बढ़ती जा रही हैं। इससे चिंतित सीमांत सुरक्षा समिति ने कहा है कि इनरलाइन को फिर से जौलजीबी लाया जाए।
सीमांत सुरक्षा समिति की अध्यक्ष लक्ष्मी परमार ने कहा कि देश की सीमाओं की रक्षा के लिए यह आवश्यक हो गया है कि सीमांत के नगरों और कस्बों में बाहरी लोगों का दखल कम किया जाए। धारचूला नगर नेपाल और तिब्बत की सीमा से सटा है। यहां पर संदिग्धों की आवाजाही बढ़ना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। सरकार को चाहिए कि इस मामले में तत्काल फैसला ले। सीमांत सुरक्षा समिति पिछले एक वर्ष से इनरलाइन शिफ्ट करने की मांग को लेकर अभियान चला रही है। कई नौजवान इस अभियान में शामिल हैं। इससे पहले भाजपा ने भी इस मुद्दे को जोरशोर से उठाया था।
ज्ञापन देने वालों में वीरेंद्र नपलच्याल, मोनिका, हयात सिंह बिष्ट, श्वेता नबियाल, तुलसी भट्ट, धन सिंह गर्ब्याल, धनुली देवी, राजू टम्टा, द्रोपदी, जयमती भट्ट, दशरथी परिहार, सोनी वर्मा, परमल सिंह रौंकली आदि लोग थे।