फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

भारत से जाने दो नेपाल गेट को हम देख लेंगे

विज्ञापन
धारचूला में काली नदी के किनारे झूलापुल खुलने के इंतजार में बैठे नेपाली। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : PITHORAGARH
विज्ञापन
धारचूला (पिथौरागढ़)। काली नदी किनारे नगर पालिका के काजी हाउस और श्मशानघाट विश्राम गृह में दो दिन से रह रहे 250 नेपालियों ने नदी का पानी पीकर और बिस्किट खाकर शनिवार की रात गुजारी। कई लोग खुले आसमान के नीचे रात बिताने को विवश हैं। वह गुहार लगा रहे हैं कि भारत से जाने दो, नेपाल का गेट हम खुद खुलवा लेंगे।
विज्ञापन

मदकोट से शनिवार के दिन और रातभर 80 किमी की दूरी तय यहां पहुंचे मजदूर प्रेम सिंह ठगुन्ना और कर्ण बहादुर ने बताया कि काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। उनके साथ 20 मजदूर हैं। रविवार को पिथौरागढ़ से सौ किमी पैदल चलकर 10 मजदूर पहुंचे। रविवार दिन तक 350 से अधिक मजदूर नेपाल के अपने गांवों को जाने के लिए यहां एकत्र हो गए। मजदूरों की परेशानियों को देखते एसएसबी के इंचार्ज निरीक्षक मान सिंह ने अपने उच्चाधिकारियों को सूचना दी। एसएसबी 11वीं वाहिनी के सेनानी महेंद्र प्रताप ने मानवता दिखाते हुए सभी मजदूरों को खाना खिलाने के निर्देश दिए। सेनानी के निर्देश पर डीडीहाट से सहायक सेनानी बासुकी नंदन पांडेय यहां पहुंचे। इसके बाद एसएसबी मेस में खाना बनाकर पुल इंचार्ज एएसआई मोहन सिंह के निर्देशन में सभी मजदूरों को भोजन कराया गया।
भोजन के सभी लोगों की डॉ. अक्षय जेरियाल और फार्मासिस्ट सुंदर बोनाल ने थर्मल स्कैनिंग से जांच की। दो दिन से सीमा पर फंसे नेपालियों में नेपाल सरकार के प्रति काफी आक्रोश पनप रहा है। उनका कहना है नेपाल सरकार अपने नागरिकों को लेने में कोई रुचि नहीं दिखा रही है। संभवत: 30 मार्च को पुल खुलने के बाद ही यह लोग अपने वतन जा पाएंगे। इससे नेपालियों में काफी रोष दिखाई दिया। उन्होंने भारतीय सुरक्षा बलों से अनुरोध किया कि यहां के झूलापुल का गेट खोल दो, नेपाल के गेट को वह स्वयं देख लेंगे। उन्होंने रोष भरे स्वर में कहा कि यदि उनके वतन की ओर से पुल का गेट नहीं खोला गया तो वह उसे तोड़ने से भी नहीं हिचकेंगे, चाहे नेपाल प्रशासन उन्हें जेल में डाले या फिर गोली ही क्यों न मार दें।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें