पिथौरागढ़। सीमांत जिले में स्वास्थ्य सेवाएं पटरी पर नहीं आ पा रही हैं। पहले से ही जनपद विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा है। अब जिले में तैनात दोनों बाल रोग विशेषज्ञों के अवकाश पर जाने से बच्चों को इलाज मिलना मुश्किल हो गया है। जिला और महिला अस्पताल में तैनात दोनों ही विशेषज्ञों के अवकाश पर जाने से ओपीडी में पहुंचने वाले और भर्ती बच्चों का इलाज कौन करेगा, यह चिंता का विषय बन गया है।
जिला और महिला अस्पताल के अलावा अन्य किसी भी अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ तैनात नहीं हैं। दोनों ही अस्पतालों में तैनात बच्चों के डॉक्टर अवकाश पर चले गए हैं। महिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ पिछले एक सप्ताह से अवकाश पर हैं। वहीं, शनिवार से जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ ने भी छुट्टी ले ली। ऐसे में पूरे जिले के बच्चों को इलाज मिलना बंद हो गया है।
हर रोज दोनों अस्पतालों में 60 से अधिक बीमार बच्चे इलाज के लिए पहुंचते हैं। शनिवार को भी जिले के विभिन्न हिस्सों से परिजन बीमार बच्चों के इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचे। यहां बाल रोग विशेषज्ञ के कक्ष के दरवाजे बंद होने से उन्हें बच्चों के इलाज के लिए निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ा।
सामान्य चिकित्सक को दी बच्चों के इलाज की जिम्मेदारी
जानकारी के मुताबिक, दोनों बाल रोग विशेषज्ञों के अवकाश पर जाने से अस्पताल प्रबंधन की दिक्कत भी बढ़ गई है। मजबूरी ऐसी कि जिला अस्पताल में तैनात सामान्य चिकित्सक को बच्चों के इलाज की जिम्मेदारी देनी पड़ी है। यह मामला स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के दावों पर सवाल खड़े कर रहा है।
कोट
मैं किसी कार्य से जिले से बाहर हूं। मामले की जानकारी ली जाएगी। दोनों विशेषज्ञों के एक साथ अवकाश पर जाना गंभीर है। - डॉ. भागीरथी गर्ब्याल, पीएमएस, जिला अस्पताल, पिथौरागढ़