-बंद सड़कों ने बढ़ाई मरीजों और गर्भवतियों की दिक्कत, अस्पताल पहुंचना हुआ मुश्किल
संवाद न्यूज एजेंसी पिथौरागढ़। सीमांत जिले में मानसूनी बारिश ने लोगों की दिक्कत बढ़ा दी है। जिला मुख्यालय में 8.5 तो मुनस्यारी में सबसे अधिक 61.4 एमएम बारिश हुई। बारिश के बाद बंद सड़कें मुसीबत बन रही हैं। हालात यह है कि बीमारों और गर्भवतियों को भी इलाज और प्रसव के लिए दर्द से कराहते हुए पैदल सफर कर अस्पताल पहुंचना पड़ रहा है। बारिश के बाद पहाड़ी दरकने से चीन सीमा को जोड़ने वाले दोनों हाईवे तवाघाट-गुंजी और धारचूला-तवाघाट हाईवे आठ घंटे तक बंद रहे। वहीं होकरा-नामिक सड़क लंबे समय से बंद होने से एक गर्भवती को प्रसव पीड़ा से जूझते हुए पैदल सफर कर अस्पताल पहुंचना पड़ा।
शुक्रवार सुबह पांच बजे के करीब धारचूला-तवाघाट सड़क पर कुलागाड़ और तवाघाट-गुंजी सड़क पर ऐलागाड़, मलघाट में पहाड़ी दरकने से बड़ी संख्या में बोल्डर गिर गए। ऐसे में दोनों सड़कों पर आवाजाही ठप हो गई और दोनों तरफ बड़ी संख्या में वाहन और यात्री फंस गए। वहीं दारमा, चौदास और व्यास घाटी का संपर्क भी कट गया। लंबे इंतजार के बाद भी सड़कें नहीं खुलीं तो कई यात्री बोल्डरों के बीच पैदल सफर करने के लिए मजबूर हुए। बीआरओ ने दोपहर एक बजे के करीब बमुश्किल बोल्डर हटाकर दोनों सड़कों पर यातायात बहाल किया।
वहीं जिले में जगह-जगह मलबा आने से 14 ग्रामीण सड़कों पर आवाजाही ठप है। ड्योड़ा-बारमौ सड़क पर दो महीने के बाद भी यातायात बहाल नहीं हो सका है। वहीं बांसबगड़-कोटा, धापाबैंड-बुई, होकरा-नामिक सड़कें बीते एक महीने से बंद हैं। लंबे समय से सड़कें बंद होने से ग्रामीण दुश्वारियां झेल रहे हैं। बीते बृहस्पतिवार को होकरा की हेमा को प्रसव पीड़ा हुई। प्रधान संतोष कुमार और खुशाल सिंह मेहता ने बताया कि सड़क बंद होने से प्रसव पीड़ा से जूझती हुई गर्भवती को कई किलोमीटर का पैदल सफर तय कर अस्पताल पहुंचना पड़ा।
वहीं शुक्रवार को गांव की बीमार बुजुर्ग हीरा देवी को भी पीठ पर ढोकर अस्पताल पहुंचाया गया। हैरानी है कि आपदाकाल शुरू होने से पूर्व सिस्टम ने बंद सड़कों को जल्द खोलने की तैयारी पूरी होने के दावे किए थे जो बारिश में धुल गए हैं। इसकी मार जिले के लोग सह रहे हैं। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी भूपेंद्र महर ने कहा कि बंद सड़कों को खोलने का काम जारी है। जल्द सभी सड़कों पर आवाजाही शुरू करा दी जाएगी।
पिथौरागढ़ में बारिश का आंकड़ा(एमएम में)
पिथौरागढ़ 8.5 बेरीनाग 6.2
मुनस्यारी 61.4 बंगापानी 52.0
गणाई गंगोली 6.0 देवलथल 5.0
गंगोलीहाट 5.0 डीडीहाट 9.60
धारचूला 12.6 कनालीछीना 45.5
तेजम 32.0 थल 8.0
चेतावनी स्तर से सिर्फ 10 सेंटीमीटर नीचे बह रही है काली
पिथौरागढ़। धारचूला क्षेत्र में हुई भारी बारिश के बाद काली नदी का जलस्तर भी तेजी से बढ़ रहा है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह चेतावनी स्तर से सिर्फ 10 सेंटीमीटर नीचे बह रही है। काली नदी का चेतावनी स्तर 889 मीटर है और यह 888.90 मीटर पर बह रही है। नदी का जलस्तर बढ़ने से धारचूला, जौलजीबी, बलुवाकोट, तीतरी, ड्योड़ा, झूलाघाट सहित अन्य स्थानों पर किनारे बसी आबादी में दहशत है। प्रशासन ने भी सतर्क रहने की चेतावनी जारी की है।