पिथौरागढ़। सीमांत जनपद में अब काला गेहूं किसानों की तकदीर बदलेगा। शुरुआती दौर में ट्रायल बेस पर इसकी खेती होगी। हर विकासखंड में दो-दो किसान इसकी खेती करेंगे। कृषि विभाग निशुल्क बीज किसानों को उपलब्ध कराएगा। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक जिले का मौसम इसकी खेती के लिए अनुकूल है। यदि ट्रायल सफल रहा तो अन्य किसानों को इससे जोड़ा जाएगा।
जिले में कृषि विभाग ने काले गेहूं की खेती से किसानों को जोड़ने की पहल शुरू की है। कृषि विभाग के मुताबिक जिले के हर विकासखंड में ट्रायल बेस पर काले गेहूं की खेती होगी। हर विकासखंड में दो-दो किसान इसके लिए चिन्हित किए गए हैं। शुरुआती दौर में चार हेक्टेयर में इसकी खेती होगी।
भविष्य में अन्य किसानों को भी इससे जोड़ा जाएगा। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक काले गेहूं की खेती के लिए जिले का मौसम अनुकूल है। 25 से 28 डिग्री तापमान पर इसका बेहतर उत्पादन होता है। कृषि विभाग सीमांत के किसानों को काले गेहूं की खेती के लिए प्रोत्साहित भी करेगा।
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एक हेक्टेयर में होता है 15 क्विंटल उत्पादन
पिथौरागढ़। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक काले गेहूं का एक हेक्टेयर भूमि पर 15 क्विंटल तक उत्पादन होता है। पर्याप्त सिंचाई, खाद और पोषक तत्वों की उपलब्धता इसके उत्पादन को प्रभावित कर सकती है।
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पौष्टिकता से भरपूर है काला गेहूं, छह हजार रुपये क्विंटल कीमत
पिथौरागढ़। विशेषज्ञों के मुताबिक काला गेहूं पौष्टिकता से भरपूर है। इसमें मिलने वाला एंटीऑक्सिडेंट शरीर की सूजन को कम करता है। इसमें मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। इसमें मिलने वाला मैग्नीशियम कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखता है। मधुमेह के रोगियों के लिए इसका उपयोग लाभकारी होता है। विशेषज्ञों के मुताबिक बाजार में एक क्विंटल काले गेहूं की कीमत छह हजार रुपये तक है।
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जिले में काले गेहूं की ट्रायल बेस पर खेती होगी। काला गेहूं पौष्टिकता के साथ ही आर्थिक तौर पर लाभकारी है। इसकी खेती के प्रति किसानों को प्रेरित कर उनकी आजीविका में वृद्धि करने के प्रयास हो रहे हैं। - अमरेंद्र चौधरी, मुख्य कृषि अधिकारी, पिथौरागढ़।