साल 2015 के मानसून की शुरुआत के बाद जिले में आपदा से पहली मौत हुई है। बेड़ूमहर का एक बकरी पालक की चट्टान की चपेट में आकर मारा गया है। शुक्रवार दोपहर एक बजे रुकी बारिश ने नदियों का जलस्तर इतना बढ़ा दिया है कि धारचूला, मुनस्यारी में 12 पैदल पुल बह गए हैं। बंगापानी में तटबंध बना रहे ठेकेदार का टिप्पर वाहन नदी के बीच में फंस गया है। कई जगह निर्माण सामग्री, मशीनें बह गई है। कई गांवों का दूसरे क्षेत्रों से संपर्क टूट गया है।
नाचनी से मिली जानकारी के अनुसार बेड़ूमहर के चंचल सिंह मेहता (50) पुत्र दलीप सिंह इन दिनों गांव से 20 किमी दूर थालाग्वार में गांव के अन्य लोगों के साथ बकरियों के साथ प्रवास पर था। शुक्रवार सुबह करीब 7 बजे चट्टान दरक कर गिरी, उसकी चपेट में आने से चंचल सिंह की मौत हो गई। साथी शेर सिंह, हीरा सिंह ने गांव के लोगों को हादसे की सूचना दी। क्षेत्र पंचायत सदस्य लक्ष्मण सिंह के नेतृत्व में ग्रामीण घटनास्थल के लिए रवाना हो गए हैं। प्रशासन को हादसे की सूचना दे दी है।
लोनिवि के अधिशासी अभियंता पीसी पंत ने अस्कोट प्रतिनिधि को बताया कि दारमा घाटी (धारचूला) के सेला, इसूगाड़, नागलिंग और चल के पैदल पुल बह गए हैं। ईई का कहना है कि व्यास घाटी में संपर्क नहीं हो पा रहा है, वहां भी नुकसान हो सकता है। धारचूला में रौंगकांग, नाभीढांग को जोड़ने वाला पुल, तीदांग-मार्छा, दांतू-नागलिंग पैदल पुल भी बह गए हैं। मुनस्यारी के बीडीओ श्याम चंद ने बताया कि मोतीघाट में तीन पुल बह गए हैं। क्वीरी और जिमियां को जोड़ने वाला पुल भी बह गया है। पुल बहने से संबंधित इलाकों के गांव अलग-थलग पड़ गए हैं।
बंगापानी में तटबंध बना रहे ठेकेदार की सीमेंट मिक्सर मशीन बह गई है। एक टिप्पर वाहन नदी में फंसा हैं। धारचूला के खोतिला में कुलदीप पाटनी की दो सीमेंट मिक्सर मशीन, एक वेल्डिंग मशीन, दो पंप बह गए। बारिश से हिमालय से निकलने वाली गोरी, महाकाली, रामगंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। पानी ने तटों को छू लिया है। पूरे वेग के साथ बह रही नदियां दहशत पैदा कर रही हैं। विधायक (सीएम) प्रतिनिधि हीरा चिराल ने बताया कि मुख्यमंत्री कार्यालय बारिश से हो रहे नुकसान पर लगातार नजर रख रहा है। प्रशासन को प्रभावितों की तत्काल मदद के आदेश दिए गए हैं। इधर, जिला प्रशासन ने बारिश को देखते हुए अलर्ट जारी किया है। जिला आपदा प्रबंधन विभाग पूरी तरह तैयार होने की बात कर रहा है।
यारसागंबू खोदने गए लोगों के लिए खतरा
मुनस्यारी/धारचूला/मदकोट। लगातार दो दिन तक हुई बारिश से उच्च हिमालयी क्षेत्र में यारसागंबू खोदने गए लोगों का जीवन संकट में पड़ गया है। धारचूला, मुनस्यारी तहसील के तमाम गांवों के लोग हर साल मई, जून में यारसागंबू खोदने के लिए हिमालय की तलहटी में जाते हैं। इस समय यारसागंबू खोजने गए लोग लौटने लगे थे। बारिश बढ़ने से हिमस्खलन के खतरे बढ़ गए हैं। कांग्रेस नेता कैलाश कोरंगा ने प्रशासन से यारसागंबू की खोज में गए लोगों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की है। दो से तीन हजार लोगों के यारसागंबू के लिए उच्च हिमालयी क्षेत्र में होने की बात कही जा रही है। एसडीएम कौस्तुभ मिश्रा का कहना है कि प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। जहां भी मदद की जरूरत होगी, तत्काल उपलब्ध कराई जाएगी।
हरड़िया में झील फटी
नाचनी। रामगंगा में हरड़िया नामक स्थान पर सितंबर 2014 से बनी झील भारी बारिश के बीच बृहस्पतिवार की रात में फट गई है। झील के पानी से किसी प्रकार का नुकसान न होने से लोगों ने राहत की सांस ली है। सितंबर में नदी में मलबा पटने से पानी की निकासी कम हो गई थी, नदी ने झील का आकार ले लिया था। यह झील काफी चर्चा में रही थी।