फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

भू-वैज्ञानिक और पर्यटन विभाग के अधिकारियों ने किया रसैपाटा गुफा का निरीक्षण

विज्ञापन
रसैपाटा खनफर में चंडिका मंदिर के सौंदर्यीकरण के दौरान मिली गुफा का भू-वैज्ञानिक और पर्यटन विभाग ? - फोटो : PITHORAGARH
विज्ञापन
पिथौरागढ़। कनालीछीना विकासखंड के रसैपाटा खनफर में चंडिका मंदिर के सौंदर्यीकरण के दौरान मिली गुफा का भूवैज्ञानिक और पर्यटन विभाग के अधिकारियों ने संयुक्त रूप से निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने गुफा की चट्टानों की जांच भी की।
विज्ञापन

शुक्रवार को जिला पर्यटन अधिकारी अमित लोहनी, भूवैज्ञानिक प्रदीप कुमार और पुरातत्व विभाग के अधिकारी गुफा के निरीक्षण को पहुंचे।
भूवैज्ञानिक ने कहा कि इस प्रकार की गुफाएं लाइमस्टोन प्रकृति की चट्टानों में प्राय देखी गई हैं, परंतु कई स्थानों पर गुफाओं में कोई खास प्रकृति के डिजाइन नहीं पाए जाते हैं। ग्राम खनफर में बनी गुफा गंगोलीहाट में पाताल भुवनेश्वर की गुफा की तर्ज पर बनी है। गुफा के अंदर प्राकृतिक जल होने के कारण विभिन्न प्रकार की मूर्ति के आकार के चित्र हैं। ये चित्र लाइमस्टोन कैल्शियम की अधिकता के कारण बने हैं।
गुफा के अंदर शंख, ओम, डिजाइनदार झालर और कई प्रकार की दैवी मूर्ति से संबंधित आकृति कैल्शियम से बनी हैं। गुफा की लंबाई लगभग 15 से 18 फुट और चौड़ाई लगभग 3 से 5 फुट तक है। ऊंचाई लगभग 2 से 2.5 मीटर है। गुफा में बनी आकृति कई रंगों में हैं।
विज्ञापन

भूगर्भीय साहित्य में इन आकृतियों को स्टेलेटाइट और स्टेलेमाइट कहा जाता है, जो लाइमस्टोन प्रकृति की चट्टानों में कैल्शियम के निक्षेपण से बनती है। इसी स्थान पर एक पुरानी गुफा भी स्थित है, जो कई वर्ष पुरानी है, जिसमें पौराणिक आकृतियां भी हैं। इस मौके पर प्रधान हरीश चंद्र तिवारी मौजूद रहे। जिला पर्यटन अधिकारी ने बताया कि भूगर्भ वैज्ञानिकों की रिपोर्ट आने के बाद प्रस्ताव बनाया जाएग्रा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें