चहज के पांडव मंदिर में जागर गाथा सुनते स्रोता। स्रोत: आयोजक
गंगोलीहाट (पिथौरागढ़)। चहज के पांडव मंदिर में आयोजित जागर गाथा में भीष्म की कथा का बखान किया गया। कथा सुनने के लिए दूर-दराज से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।
जगरिया इंद्र सिंह भंडारी, पूरन सिंह भंडारी ने 18 वें दिन महाभारत की कथा सुनाते हुए कहा कि भीष्म को अपने पिता शांतनु से यह वरदान मिला था कि वह अपनी इच्छा से ही प्राण त्याग सकेंगे। युद्ध में अर्जुन के दिव्य बाणों से उनका शरीर छलनी हो गया। वह धरती पर नहीं गिरकर बाणों के ऊपर ही लेट गए।
भीष्म ने अशुभ काल में मृत्यु से बचने और मोक्ष पाने के लिए सूर्य के उत्तरायण होने का इंतजार किया। इस मौके पर अशोक पंत, गिरीश जोशी, कौस्तुभ जोशी, मनोज जोशी, माही जोशी, कमला जोशी, विद्या जोशी, चंद्रकला पांडे मौजूद रहे।