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बेड़ीनाग में घोड़ों से ढोया जा रहा पानी

Fri, 15 Apr 2016 10:05 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बेड़ीनाग
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घोड़ों से ढोया जा रहा पानी - फोटो : अमर उजाला
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बेड़ीनाग के गांवों में पेयजल संकट बना है। यहां लोग पांच किलोमीटर दूर से घोड़ों में पीने का पानी ढो रहे हैं। एक बार में एक घोड़े से 80 लीटर पानी पहुंचता है। इसका भाड़ा 100 रुपये देना पड़ता है। 180 परिवार वाले भटीगांव में लगभग हर परिवार इसी तरह घोड़ों से पानी ढुलान कर रहे हैं, जिन लोगों के पास अपनी कारें हैं, वह कार से भी पानी ढो रहे हैं। भटीगांव के लोगों को पांच किलोमीटर दूर सुकल्याड़ी स्रोत से पानी का इंतजाम करना पड़ रहा है।
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भटीगांव बेड़ीनाग नगर से थोड़ा हटकर स्थित है। ज्यादा ऊंचाई में होने के कारण जल संस्थान की पेयजल लाइन का पानी वहां तक पहुंचने से पहले समाप्त हो जाता है। चौथे या पांचवें दिन नलों में थोड़ा बहुत पानी आता है। अगली बार नलों में पानी कब आएगा इसका अंदाजा नहीं रहता, जिन लोगों का परिवार बड़ा है और पानी की खपत ज्यादा है, उनको किराया देकर पानी की व्यवस्था करनी पड़ रही है। गांव के बड़े हिस्से तक रोड नहीं है। इस कारण न तो जल संस्थान का टैंकर ही पहुंच सकता है और न निजी वाहन से पानी लाना संभव है, जिन घरों के पास तक सड़क है वह तो वाहनों से पानी ला रहे हैं, लेकिन ज्यादातर लोगों ने घोड़े वालों की मदद लेनी शुरू कर दी है। ज्यादातर परिवार रोजाना पानी पर दो सौ से लेकर तीन सौ रुपये तक अतिरिक्त खर्च कर रहे हैं। जल संस्थान के अवर अभियंता गजेंद्र सिंह ने बताया कि संकट से निपटने के लिए कोई विकल्प नहीं है। 

ऐसी स्थिति पहले कभी नहीं देखी
भटीगांव निवासी भूपाल चन्याल का कहना है कि पानी का इतना गंभीर संकट पहले कभी नहीं देखा। गर्मियां हर साल आती हैं, लेकिन पानी की सप्लाई काम चलाने भर के लिए जरूर हो जाती थी। इस बार तो मार्च से ही संकट खड़ा हो गया और अब तो यह चरम पर पहुंच गया है। आने वाले दिनों में कैसे काम चलेगा, यही चिंता सता रही है।
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समाधान न निकला तो गांव छोड़ना पड़ेगा
भटीगांव निवासी दिनेश चंद्र जोशी का कहना है कि यदि पेयजल संकट का जल्दी समाधान नहीं निकलता है तो लोगों को पानी के कारण गांव छोड़ना पड़ जाएगा। अब तक तो शिक्षा, स्वास्थ्य को लेकर लोग दूसरे शहरों में जा रहे थे। अब तो पानी का संकट लोगों को गांव छोड़ने के लिए विवश करने वाला है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को इस बारे में सोचना चाहिए। 
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