खतरे की जद में आया थल बालेश्वर मंदिर
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बुधवार रात हुई मूसलाधार बारिश से थल स्थित पौराणिक महत्व के बालेश्वर महादेव की सुरक्षा दीवार भरभरा कर गिर गई। इससे ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व के मंदिर को खतरा पैदा हो गया है। सूचना मिलते ही पुरातत्व विभाग के अन्वेषण अधिकारी ने थल पहुंचकर स्थलीय निरीक्षण किया।
बृहस्पतिवार सुबह चार बजे थल मंदिर की सुरक्षा दीवार ध्वस्त हो गई। सूचना मिलते ही क्षेत्रीय पुरातत्व संस्कृति विभाग अल्मोड़ा के अन्वेषण अधिकारी सीएस चौहान और सिंचाई विभाग के अवर अभियंता जेसी नैनवाल ने थल पहुंचकर मंदिर का निरीक्षण किया। मंदिर के प्रधान पुजारी मथुरा दत्त भट्ट ने बताया कि सुरक्षा दीवार में एक साल पहले दरार आ चुकी थी। इससे मेले एवं अन्य धार्मिक आयोजनों के समय दीवार के ध्वस्त होने का खतरा बना रहता था।
9वीं से 14वीं सदी में बना है मंदिर
रामगंगा नदी किनारे स्थित बालेश्वर मंदिर पौराणिक महत्व का है। मंदिर क्षेत्रीय पुरातत्व एवं संस्कृति विभाग अल्मोड़ा के अधीन है। पुरातत्व अन्वेषक चंद्र सिंह चौहान के अनुसार यह मंदिर 9वीं से 14वीं सदी के बीच निर्मित है। तीन वर्ष पहले इस मंदिर के शीर्ष में लगा छत्र पुरातत्व विभाग ने बदला था। उन्होंने बताया कि मंदिर की सुरक्षा दीवार के ध्वस्त होने की जानकारी उच्चाधिकारियों को दी गई है। धनराशि मिलते ही सुधार किया जाएगा।
सिंचाई विभाग करेगा सुरक्षा के प्रबंध
पुरातात्विक महत्व के बालेश्वर मंदिर में सावन के महीने विशेष पूजा-अर्चना होती है। इसके लिए दूरदराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। 16 जुलाई को सावन का पहला सोमवार है। ऐसे में मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़भाड़ रहेगी। मंदिर परिसर की सुरक्षा दीवार धंसने के कारण सिंचाई विभाग द्वारा जल्दी सुरक्षा के प्रबंध किए जाएंगे।