आठूं पर्व मनाने को लेकर मंथन करती बस्तड़ी की महिलाएं
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आपदा के दंश और परंपराओं को जीवित रखने के द्वंद्व के बीच आखिरकार बस्तड़ी के लोगों ने फैसला लिया है कि आठूं पर्व को जरूर मनाया जाएगा। पहले से चली आ रही परंपराओं को छोड़ना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। बस्तड़ी में महिलाओं ने बैठक की और तय किया कि आठूं पर्व मनाया जाएगा। पिछले साल तक गांव में गोविंद भट्ट के मकान में आठूं की पूजा होती थी, लेकिन इस बार यह मकान आपदा की भेंट चढ़ गया है। अब तय किया गया कि सिंघाली कस्बे में रहने वाले गणेश दत्त भट्ट के मकान में आठूं की पूजा होगी।
बस्तड़ी निवासी भावना भट्ट ने महिलाओं की बैठक में कहा कि आठूं के अवसर पर गौरा और महेश का पूजन होता है। आपदा के कारण हालांकि गांव उजड़ गया है, लेकिन जो लोग जीवित बचे हैं, उनका दायित्व बनता है कि वह परंपराओं को फिर से जीवित करें। 24, 25 अगस्त को महिलाएं गौरा और महेश की प्रतिमाएं तैयार करेंगी। पंडित को बुलाकर पूजा अनुष्ठान किया जाएगा। यह बात अलग है कि इस बार महिलाएं खेल, चांचरी के कार्यक्रम नहीं करेंगी।
रमा भट्ट ने कहा कि यदि परंपराओं को छोड़ देंगे तो आपदा का दुख ज्यादा महसूस होगा। आपदा के कारण जो होना था वह हो गया। अब नए सिरे से जिंदगी शुरू करने की कोशिश चल रही है तो तीज, त्योहारों को भी उसी हिसाब से मनाया जाएगा। गांव के शंकर दत्त भट्ट ने कहा कि आठूं का पर्व पूजा अनुष्ठान तक ही सीमित रखा जाएगा। उन्होंने महिलाओं के साहस की सराहना की।