दार्चुला नेपाल में बंधक बनाई गई जेसीबी
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नेपाल अपनी ओर कई साल पहले तटबंध निर्माण कर चुका है। भारत की ओर से निर्माण कार्य के दौरान कभी भी आपत्ति दर्ज नहीं की गई। भारत ने धारचूला कस्बे की सुरक्षा के लिए जब अपनी ओर तटबंध का निर्माण शुरू किया तो नेपाल के कुछ लोगों ने कई बार पत्थरबाजी कर माहौल बिगाड़ने का प्रयास किया गया।
वर्ष 2013 में आई भीषण आपदा में काली नदी ने धारचूला से लेकर झूलाघाट तक भारी तबाही मचाई थी। तब नदी कई मकानों को बहा ले गई थी। नेपाल पहले ही दार्चुला में मजबूत तटबंध बनाने के साथ ही उसपर सड़क भी बना चुका है।
भारत में काली नदी किनारे जब से तटबंध निर्माण का कार्य शुरू हुआ है साल 2022 से 2023 तक बीस से अधिक बार नेपाल की ओर से पत्थरबाजी की गई। कुछ मामलों में ऑपरेटर और मजदूर मामूली रूप से चोटिल भी हुए थे। दोनों देशों के प्रशासनिक अधिकारियों की बातचीत के बाद स्थितियां कुछ समय तक ठीक रहीं लेकिन कुछ असामाजिक तत्व एक बार फिर माहौल बिगाड़ने का प्रयास करने लगे हैं। तपोवन में नेपाल की ओर से बीच नदी में मशीन लगाई गई है।
एनएचपीसी ने अपनी कॉलोनी को खतरा बताते हुए सीमांकन की मांग की थी अभी तक नेपाल की ओर से कोई प्रयास नहीं किया गया है। नेपाल प्रशासन की चुप्पी और वहां के कुछ लोगों की इस तरह की हरकतों से व्यापार संघ और रं कल्याण संस्था सहित अन्य संगठनों में नाराजगी है।
सोशल मीडिया में पोस्ट की जा रही भारत विरोधी गतिविधियां
नेपाल के कुछ तत्व सोशल मीडिया में भी भारत विरोधी गतिविधियां कर रहे हैं। पहले भी कई बार जमीन विवाद को सोशल मीडिया में बेवजह हवा देने का प्रयास किया जा चुका है। इससे भारतीय लोगों में नाराजगी है। लोगों का कहना है कि भारत-नेपाल दोनों देशों के बीच रोटी- बेटी के रिश्ते हैं। सीमांत क्षेत्र के अधिकतर गांवों में दोनों देशों के बीच वैवाहिक रिश्ते होते हैं। इसके अलावा व्यापारिक संबंध भी हैं, लेकिन कुछ लोग इन रिश्तों में दरार डालने का प्रयास कर रहे हैं।