मल्लिकार्जुन स्कूल का बाल वैज्ञानिक आयुष चंद चंडीगढ़ विश्वविद्यालय मोहाली में 27 से 31 दिसंबर तक होने वाली राष्ट्रीय बाल विज्ञान प्रदर्शनी में अपना प्रोजेक्ट प्रस्तुत करेगा। आयुष ने जिला पिथौरागढ़ से रतवाली और लंपाटा के जंगलों में मिलने वाले चीड़ और बांज के पेड़ों का पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन किया है।
उन्होंने उल्लेख किया है कि जिन जंगलों में बांज के पेड़ों की अधिकता होती है वहां पर नमी का स्तर ज्यादा होता है। पानी के स्रोत सक्रिय रहते हैं। इन जंगलों की हवा शुद्ध होती है। रतवाली के जंगलों में बांज की अधिकता है। दूसरी तरफ चीड़ के जंगलों में नमी का मात्रा बहुत कम होती है। चीड़ जमीन की नमी को सोख देता है और अपने आसपास दूसरी वनस्पति को पनपने नहीं देता। चीड़ की पत्तियां ज्वलशील होती हैं और गर्मियों में आग की घटनाएं भी चीड़ के ही जंगलों में ज्यादा होती है।
आयुष ने मौसम एवं जलवायु की समझ मुख्य विषय के अंतर्गत मौसम, जलवायु एवं परितंत्र उपविषय में यह प्रोजेक्ट तैयार किया। नवंबर में गुरुनामक एकेडमी नानकमत्ता में हुई राज्य स्तरीय विज्ञान प्रदर्शनी में उनके प्रोजेक्ट को सराहा गया और इसे राष्ट्रीय प्रतियोगिया के लिए चयनित कर लिया गया।